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थानाध्यक्ष को लेकर फिर खुला बड़ा राज... अफसरों की खामोशी पर उठे सवाल, पढ़िए पूरा मामला

Fri, 02 Oct 2020 11:47 AM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह - फोटो : Facebook from SO Dharmendra Singh
मेरठ में थानाध्यक्ष रहने के दौरान धर्मेंद्र सिंह ने जुल्म की इंतिहा कर दी। कई बेकसूर लोगों को मुल्जिम बनाया तो कई आरोपियों को बेगुनाह ठहरा दिया। उसके खिलाफ एक मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में उसने दो बार एक ही व्यक्ति को अवैध हथियार बनाने में नामजद आरोपी बना दिया। सीओ की जांच रिपोर्ट में इस व्यक्ति को बेकसूर और धर्मेंद्र को दोषी पाया गया था। बावजूद इसके उसके इस गुनाह पर पर्दा डाल दिया गया। हस्तिनापुर के थाना प्रभारी रहे धर्मेंद्र को आलीशान फार्म हाउस बनाने के मामले में लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनके फ्लैट में बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है।
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फार्म हाउस पर लगा ताला - फोटो : अमर उजाला
वहीं गुरुवार को परीक्षितगढ़ के मिर्जापुर गांव के लोग पुलिस के एक बड़े अधिकारी से मिले। लोगों ने बताया कि 12 अक्तूबर 2018 को धर्मेंद्र ने परीक्षितगढ़ क्षेत्र में एक तमंचा फैक्टरी पकड़ी थी। इसमें दो कारीगरों साबिर और हनीफ को गिरफ्तार कर सुखदेव सिंह को नामजद आरोपी बनाया था। तत्कालीन एसएसपी से शिकायत पर इसकी जांच शुरू हुई। सीओ सदर देहात के बाद जांच सीओ किठौर को सौंपी गई। जांच चल ही रही थी कि धर्मेंद्र ने हस्तिनापुर में एक और तमंचा फैक्टरी पकड़ ली। उसमें फिर सुखदेव सिंह को आरोपी बना दिया गया।
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थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह का फ्लैट - फोटो : अमर उजाला
दोनों मामलों की जांच सीओ किठौर ने की थीं और इसमें सुखदेव को क्लीन चिट देने के साथ ही धर्मेंद्र को दोषी करार दिया गया था। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारी को सौंप दी गई, लेकिन धर्मेंद्र के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उच्चाधिकारी की शह के चलते धर्मेंद्र ने सुखदेव का मानसिक उत्पीड़न किया। दबाव बनाने के लिए उसके घर पर दबिश दी गई। इसके खिलाफ सुखदेव की ओर से 24 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 10 सितंबर को याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में हाईकोर्ट ने मेरठ के एसएसपी, हस्तिनापुर के एसओ धर्मेंद्र और विवेचक सत्यवीर को चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है।

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थानाध्यक्ष का फाइल फोटो और आलीशान फार्म हाउस और फ्लैट - फोटो : अमर उजाला
हस्तिनापुर थाने के निलंबित एसओ धर्मेंद्र के मुख्य आरोपी को बचा रही थी पुलिस
सीओ किठौर की जांच में सामने आया कि हथियार बनाने के मुख्य आरोपी को बचाने के लिए धर्मेंद्र ने यह काम किया था। दरअसल, सुखदेव का आरोपी से आपसी विवाद था। आरोपी के कहने पर ही धर्मेंद्र ने सुखदेव को आरोपी बना दिया। 
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स्वीमिंग फूल - फोटो : अमर उजाला
अवैध हिरासत में राजकुमार को रखा था
धर्मेंद्र के खिलाफ दूसरी जांच एक बेकसूर व्यक्ति राजकुमार को दो दिन अवैध हिरासत में रखने की है। इसकी भी जांच सीओ किठौर ने की थी और धर्मेंद्र दोषी पाया गया था। 
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फार्म हाउस के एक कमरे में लगा एसी लाल घेरे में। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
15 टन मांस गायब, ट्रक की बरामदगी दिखाई
धर्मेंद्र के मेडिकल थाने के कार्यकाल का भी एक मामला सामने आ रहा है। धर्मेंद्र ने 15 टन मांस से भरा ट्रक पकड़ा था। इसका मुकदमा अपराध संख्या 185/17 है। शिकायतकर्ता ने कहा कि मांस गायब कर दिया गया और पुलिस ने केवल ट्रक की ही बरामदगी दर्शाई थी। मामले की जांच एडीजी कर रहे हैं।  
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फार्म हाउस में बना शानदार कॉटेज। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
फाइल नंबर 813 और 145 में धर्मेंद्र के राज
पुलिस के रिकॉर्ड में धर्मेंद्र के कारनामे फाइल नंबर 813 व 145 में हैं। पीड़ित सुखदेव ने पुलिस अधिकारी को बताया है कि अवैध तमंचा बनाने में गलत नामजदगी की फाइल नंबर 813 और अवैध हिरासत में रखे गए राजकुमार की फाइल नंबर 145 सीओ किठौर के ऑफिस के अलावा एसएसपी ऑफिस में रखी हुई है।
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फार्म हाउस में बना कॉटेज - फोटो : अमर उजाला
हर बिंदु की बारीकी से जांच
धर्मेंद्र के कारनामों की दोनों फाइल तलब की गई हैं। हर बिंदु की बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद धर्मेंद्र पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी ली जाएगी। - राजीव सभरवाल, एडीजी, मेरठ जोन

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