सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। परिवार के एक सदस्य को भूल नहीं पाते कि दूसरे की याद में फिर आंखें नम हो जाती हैं। परिवारों पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि इन के दर्द को सिर्फ यही समझ सकते हैं। एक बेटे की शांति के लिए आज यज्ञ कराते हैं तो अगले दिन दूसरे बेटे की श्रद्धांजलि सभा होती है। क्या बीत रही होगी इन परिवारों पर... सोचकर भी कलेजा कांप जाता है। कोरोना महामारी के चलते अपने परिवारों के कई-कई सदस्यों को खोने वाले पत्नी-बेटे-बेटी और बूढ़े मां-बाप को यह दर्द ताउम्र सालता रहेगा। बेबस परिजन बिलखने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। रो-रोकर वे बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि जो उनके साथ हुआ वह दुनिया में किसी के साथ भी न हो।
मेरठ छावनी में रहने वाले एक ग्रेगरी रेमंड राफेल के बेटे जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी इंजीनियर थे। 23 अप्रैल को दोनों ने अपना 24 वां जन्मदिन मनाया था, लेकिन अगले दिन ही वह कोरोना का शिकार हो गए। 13 और 14 मई को दोनों भाइयों ने दम तोड़ दिया।