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Teacher's Day: शिक्षकों ने बदली जिंदगी... ताउम्र रहेंगे याद, सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, नैतिक मूल्य भी सिखाए

Thu, 05 Sep 2024 10:45 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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स्व. श्री डालचंद वर्मा व अरुण - फोटो : अमर उजाला
शिक्षक मार्गदर्शक हैं। न सिर्फ शिक्षा देते हैं, बल्कि जीवन की सीख भी देते हैं। शिक्षकों की सीख ने अनगिनत लोगों की जिंदगी संवारी है। इस बार शिक्षक दिवस के अवसर पर लोगों से उनके शिक्षकों को लेकर अनुभव मांगे गए थे। काफी लोगों ने अनुभव भेजे, जिनमें से चुनी गईं कुछ लोगों की कहानियां आपको बता रहे हैं...

प्रधानाचार्य नहीं होते तो स्कूल से नाम कट जाता 
मैं अरुण कुमार जागृति विहार में रहता हूं। जीएसटी विभाग में वरिष्ठ सहायक हूं। अगर कक्षा नौ में मेरे प्रधानाचार्य डॉ. डालचंद वर्मा न होते तो शायद तभी मेरी पढ़ाई खत्म हो गई थी। मैं आगे पढ़ नहीं पाता। बात लगभग 23 वर्ष पुरानी है। उस वक्त मैं राम सहाय इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। सड़क दुर्घटना में पिता के पैर में फ्रैक्चर था। पेट में समस्या होने के कारण माता का ऑपरेशन होना था। उस समय स्कूल फीस जो छह माह में एक बार ली जाती थी, मेरे परिजन उसे दे नहीं पा रहे थे। नौबत नाम काटने की आ गई। बात उस वक्त के प्रधानाचार्य डॉ. डालचंद वर्मा तक पहुंची, जो सख्त अनुशासन, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। मुझे बुलाया गया। डर से दिल की धड़कन तेज थी। शरीर कांप रहा था। फीस जमा न करने की वजह पूछी गई। मैंने बताया। प्रधानाचार्य ने खुद से मेरी फीस जमा की। मरते दम तक मैं उनका आभारी रहूंगा। 
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शिक्षिका उपासना वर्मा व सलोनी कश्यप - फोटो : अमर उजाला
टीचर की डांट ने बनाया रोवर रेंजर  
मैं सलोनी कश्यप मानसरोवर काॅलोनी मेरठ की रहने वाली हूं। मेरी इतिहास की शिक्षिका उपासना वर्मा ने न सिर्फ पढ़ाती थीं, बल्कि जीवन मूल्य भी सिखाती थीं। लेकिन जब होमवर्क नहीं करते थे तो डांटती थीं। उनकी डांट से प्रेरणा मिली और आज मैं एक बेस्ट स्टूडेंट हूं।

उन्हीं ने मुझे स्काउट गाइड के बारे में सिखाया और मैं मेरठ कॉलेज के स्काउट गाइड में रोवर रेंजर हूं। मैं उनका सच्चे दिल से धन्यवाद करती हूं। उनके लिए चार पक्तियां कहती हूं, गुरु बिन ज्ञान कहां, उसके ज्ञान का आदि न अंत यहां, गुरु ने दी शिक्षा जहां, उठी शिष्टाचार की मूरत वहां। 
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सांसद राजकुमार सांगवान - फोटो : अमर उजाला
गुरु के आशीर्वाद से ही आज सांसद हूं
मैं बागपत लोकसभा सीट से सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान हूं। मेरे जीवन में यहां तक पहुंचने में शिक्षकों का सबसे ज्यादा आशीर्वाद रहा। जब ग्रेजुएशन में कॉलेज आने के पहले साल के अंदर ही वह छात्र राजनीति करने लगे तो उनको कई शिक्षक बहुत स्नेह करते थे। 

एक दिन चार-पांच शिक्षक एक साथ बैठे हुए थे। उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि राजनीति तो करते रहो लेकिन सांगवान पढ़ते भी रहना। अगर पढ़ाई नहीं की तो लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन पाओगे। इसके बाद मैंने छात्र राजनीतिक की, लेकिन परीक्षा के दौरान पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। राजनीति में मेरे गुरु एकमात्र चौधरी चरण सिंह रहे। सर्किट हाउस में उनसे पहली मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा था कि छात्रों की बात को ईमानदारी से उठाना। उनकी इस बात को हमेशा ध्यान में रखा और आज उन्हीं के आशीर्वाद से सांसद हूं।

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डाॅ अर्चना सिंह व बिलाल मंसूरी बाएं - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं नैतिक मूल्य सिखाए 
मैं एम बिलाल मंसूरी मवाना का रहने वाला हूं। दिव्यांग हूं और दिव्यागों के आधिकारों और उत्थान के लिए करता हूं। सरकारी योजना, नौकरी और लाभदायक सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाता हूं। मैं डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ से परास्नातक कर रहा हूं। मैं ग्रेजुएशन के आखिरी साल में था।

मैंने इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। यहां मेरिट के आधार पर प्रवेश होना था, लेकिन तब तक मेरा रिजल्ट नहीं आया था। मैं परेशान था। मेरे विभाग की कॉर्डिनेटर डॉ. अर्चना सिंह ने मेरी समस्या समझी। मुझे लखनऊ बुला लिया और मेरा एडमिशन कराया। विश्व की बड़ी संस्था यूनिसेफ में प्रोजेक्ट से जोड़ा। उन्होंने मुझे सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य भी सिखाए।
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योगेश उपाध्याय व पंकज उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला
कमजोर बच्चों की फीस जमा करने की मिली सीख 
मैं पंकज उपाध्याय किनानगर का रहने वाला हूं। एक कोचिंग सेंटर चलाता हूं। मेरे गुरु योगेश उपाध्याय ने मुझे शिक्षक बनाया। गणित और विज्ञान पढ़ाया। इस काबिल बनाया कि मैं शिक्षक बन सका। उन्होंने जिंदगी जीना सिखाया। मेरा जीवन संवार दिया। जो गरीब बच्चे उनके स्कूल में फीस जमा नहीं कर पाते थे वह उनकी फीस जमा कर दिया करते थे। उनकी सीख से मैं भी वहीं कार्य कर रहा हूं। जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनकी फीस जमा कर देता हूं। 
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