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सिर्फ सिनौली ही नहीं यहां भी छिपा है इतिहास, मिली 1800 साल पुरानी सूर्यदेव की मूर्ति, देखें तस्वीरें

Mon, 24 Feb 2020 05:57 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

सिनौली उत्खनन के बाद अब मेरठ में भी एक 1800 साल पुरानी मूर्ति मिली है। देखें तस्वीरें...
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1800 साल पुरानी मूर्ति मिली - फोटो : अमर उजाला
बागपत में सिनौली उत्खनन के बाद अब मेरठ में भी एक 1800 साल पुरानी मूर्ति मिली है। इससे लगता है कि हस्तिनापुर के भावनपुर थाना क्षेत्र में भी इतिहास छिपा हुआ है। चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी के अनुसार, यह मूर्ति सूर्य देवता की है।
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सिनौली उत्खन - फोटो : अमर उजाला
वहीं सिनौली में भी उत्खनन के दौरान पहले कई बार हजारों साल पुराने अवशेष मिल चुके हैं। पांच हजार साल पहले भी महिलाएं श्रृंगार की बेहद शौकीन थी। शवादान गृह में महिला के कंकाल के पास तांबे का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिलने से इसकी पुष्टि हुई है।
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सिनौली गांव में उत्खनन, - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा यहां एक कब्र और मिली थी। सिनौली उत्खनन में अब तक दो कब्र मिल चुकी हैं।

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सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा सिनौली उत्खनन में महिला, बच्चों और पुरुषों के कंकाल, आभूषण, शाही ताबूत, तलवार, रथ, अनाज, बड़ी संख्या में मृदभांड और प्राचीन दीवार मिल चुकी हैं।
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1800 साल पुरानी मूर्ति मिली - फोटो : अमर उजाला
अब मेरठ के भावनपुर में मिली मूर्ति

भावनपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव में करीब 1800 साल पुरानी मूर्ति मिली है। चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी का मानना है कि यह मूर्ति सूर्य देवता की है। संभवत: इसे राजा कनिष्क के काल में बनाया गया होगा। फिलहाल पुलिस ने मूर्ति को एक ग्रामीण की सुपुर्दगी में सुरक्षित करा दिया है।
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मूर्ति बरामद - फोटो : अमर उजाला
गांव औरंगाबाद के प्रधान मोहित ने बताया कि यह मूर्ति कई साल पहले काली नदी की खुदाई में मिली थी। इसकी गर्दन से ऊपर का हिस्सा टूटा था। लोगों ने उसे गांव के मंदिर में रखवा दिया था। शनिवार को कुछ ग्रामीण मूर्ति को ठीक कराने के लिए हस्तिनापुर ले गए। इस दौरान उसके प्राचीन होने की जानकारी मिली। सूचना पर विवि के इतिहास विभाग के शिक्षक और भावनपुर एसओ संजय कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी लेने के बाद मूर्ति को गांव के युवक संदीप शर्मा की सुपुर्दगी में रखवा दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर गांव में खुदाई कराई जाए तो और भी पुरातात्विक अवशेष मिल सकते हैं।
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मूर्ति मिली - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने नहीं दी सुपुर्दगी

गांव औरंगाबाद में 1800 साल पुरानी सूर्यदेव की मूर्ति मिलने की जानकारी पर चौ. चरण सिंह विवि के इतिहास विभाग की टीम हस्तिनापुर पहुंची। टीम ने पुरातात्विक महत्व की इस मूर्ति को अपनी सुपुर्दगी में लेने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने मूर्ति देने से इनकार कर दिया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो ग्रामीण हंगामा करने लगे। बाद में पुलिस ने प्राचीन मूर्ति को गांव के युवक संदीप की सुपुर्दगी में रखवा दिया।

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1800 साल पुरानी मूर्ति मिली - फोटो : अमर उजाला
ग्राम प्रधान एवं भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मोहित ने बताया कि विवि से आई इतिहासकारों की टीम का शुभम पंवार, चेतन पंवार, संदीप शर्मा, महेश शर्मा, राकेश चौहान, अमन पाल, सोनू पाल, राहुल आदि ने विरोध किया। विवि की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि प्राचीन धरोहर को अगर सही जगह नहीं पहुंचाया गया तो उसके चोरी होने का डर है। अगर यह मूर्ति विवि के इतिहास संग्रहालय में रखी जाए तो शोध विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर भी ग्रामीण नहीं माने। उन्होंने विरोध जताया तो विवि की टीम लौट गई। विवि के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी ने कहा कि मूर्ति के पत्थर की जांच के बाद ही उसकी सही उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रथमदृष्टया यह राजा कनिष्क के काल की समझ आ रही है।
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सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला
पुरातत्व विभाग कराए खुदाई

हस्तिनापुर में मूर्ति को ठीक कराने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि यह मूर्ति कई सालों पहले काली नदी के किनारे खुदाई में मिली थी। बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में नदी के किनारे बहुत बड़ा मंदिर था। अगर पुरातत्व विभाग गांव के पुराने टीलों की खुदाई कराए तो यहां और भी प्राचीन धरोहरें मिल सकती हैं।

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