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ओलंपियन जीतू राय को हरा चुका है शूटर सौरभ चौधरी, ये है सटीक निशाने का राज, देखें तस्वीरें

Tue, 21 Aug 2018 06:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सौरभ चौधरी
पालेम बांग में सोना झटकने वाले सौरभ चौधरी की कामयाबी परीकथा जैसी है। सिर्फ तीन साल में किसान का बेटा 'गोल्डन ब्वाय' बन गया। दिल थाम देने वाले वाले मुकाबले में गोल्डन ब्वाय ने जापान के खिलाड़ी को आखिर तक टक्कर दी। उनकी कहानी ऐसे सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कामयाबी के लिए मुश्किलों से जूझ रहे हैं। आइए जानते हैं कैसे संघर्ष की आंच में तपकर कुंदन बन गया बिनौली का लाल :-
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सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
कोच अमित श्योराण की पिस्टल से साल 2015 में दिल्ली में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप में यूथ वर्ग का पहला गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद सौरभ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सफलताओं का सिलसिला चला तो एशियन गेम तक जारी है। 
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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
परिवार ने साथ दिया और पिस्टल खरीदकर दी। रोज 12 किमी का सफर टैंपु से करते हुए सौरभ कलीना से बिनौली तक जाता रहा और यहां करीब आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गया। 

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बेटे के मेडल दिखातीं सौरभ चौधरी की मां - फोटो : अमर उजाला
स्वर्ण पदक विजेता सौरभ चौधरी के निजी कोच अमित श्योराण और उसके भाई नितिन चौधरी बताते हैं कलीना से कुछ किशोर रोजाना शूटिंग के लिए बिनौली जाते थे। मार्च 2015 में किसान जगमोहन सिंह के बेटे सौरभ चौधरी ने शूटिंग सीखने के इच्छा जताई। 
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शूटर सौरभ चौधरी - फोटो : अमर उजाला
अप्रैल 2015 में बड़ा भाई नितिन चौधरी सौरभ को लेकर बिनौली पहुंचा और कोच अमित श्योराण से मिलकर एडमीशन करा दिया। यहां से शुरू हुआ सौरभ चौधरी की मेहनत और सफलता का सिलसिला। रेंज पर पहली बार पिस्टल देखी। शुरूआत अभ्यास के बाद कोच अमित श्योराण ने सौरभ को अपनी पिस्टल से खेलने का अवसर दिया। 
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सौरभ के गांव जश्न मनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
सौरभ ने दिल्ली में साल 2015 में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप के यूथ वर्ग गोल्ड मेडल जीता। यह पहली बड़ी कामयाबी थी। कलीना से बिनौली तक रोज 12 किमी का सफर और करीब आठ घंटे तक कड़ा अभ्यास। कामयाबी मिलनी शुरू हुई तो कोच और परिवार ने सौरभ की प्रतिभा को परख लिया। साल 2016 में करेल के त्रिवेंद्रम में यूथ खेलों में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीतकर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।
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घर में प्रैक्टिस करता था सौरभ - फोटो : अमर उजाला
इसे सौरभ की कामयाबी का राज कहें या शूटिंग का जुनून कि सौरभ ने तीन साल लगातार शूटिंग रेज में तो अभ्यास किया ही साथ ही घर पर भी शूटिंग पॉइंट बनाया। जब भी वक्त मिलता वह इस पर निशाना लगाते और आज उनकी मेहनत गोल्ड के रुप में दुनिया के सामने है।

 

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saurabh chaudhary
साल 2016 में कई विदेशी दौरे हुए, लेकिन पहली बड़ी कामयाबी मिली साल 2017 में। 22 से 29 जून तक जर्मनी के सुहल में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीता। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2016 के नेशनल खेलों में ओलंपियन जीतू राय को हराकर सौरभ चौधरी ने सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी थी। एशियन खेलों में भी कोरिया के ओलंपियन को हराया। दिग्गज खिलाड़ियों के बीच खड़ा होकर सौरभ उनसे हमेशा प्रेरणा लेता रहा।  

 
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सौरव चौधरी
पहले करीब एक साल तक कोच की पिस्टल से खेलने वाले सौरभ को परिवार ने किसी तरह करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर पिस्टल दिलाई। भाई नितिन चौधरी बताते हैं कि सौरभ के जुनून को देखकर ही परिवार ने पिस्टल दिलाने का फैसला किया था। अपनी पिस्टल से वह बेहद लगाव करता है। 
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