विलाप करते परिजन
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वहीं बलवंत के एक बेटे सत्यवान की सुबह ही मौत हो गई, जबकि सत्यवान का भाई झगड़ू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम होते-होते वह भी जिंदगी से हार गया। दो सगे भाइयों की मौत होने के बाद गांव का हर शख्स दुख में डूब गया, हर आंख से आंसू निकल पड़े। गांव में चूल्हे नहीं जले।