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बिलखते हुए मां बोली- मेरे लाल का चेहरा तो दिखा दो, पत्नी ने कहा- मैं तो अब जिंदा लाश, 21 तस्वीरें

Wed, 20 Feb 2019 01:13 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
हर तरफ मातम। सिसकियां। शहीद की मां चुप होती तो बहन के आंसुओं का सैलाब बहने लगता। उसको चुप कराते तो पत्नी चीत्कार करने लगती। हर किसी को बिलखता देख परिवार के मुखिया भी फफकने लग जाते। मुंह छिपाकर बस यही बुदबुदाते कि अजय तू तो चला गया। बच्चों का क्या होगा।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 28 घंटे तक इस परिवार ने जो झेला वो कोई न समझ सकता। न महसूस कर सकता है। इकलौते लाल को खोने वाला ये परिवार कभी इस भरपाई को पूरा नहीं कर पाएगा।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
अजय के बड़े होते बेटे के सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा। अजय देश के लिए तो शहीद हो गए। लेकिन अपने परिवार को वे ताउम्र कभी न भरने वाला जख्म दे गए।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
जानी का बसा टीकरी गांव कभी सुर्खियों में नहीं रहा। 720 लोगों की आबादी। बेहद शांत माहौल। लेकिन सोमवार सुबह 8:30 बजे यहां के निवासी सेना से रिटायर्ड वीरपाल सिंह के घर मनहूस खबर आई। जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया। खबर थी कि जम्मू के पुलवामा में तैनात वीरपाल के बेटे अजय कुमार के आतंकियों के सर्च ऑपरेशन में शहीद होने की। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
अजय की पांच माह की गर्भवती पत्नी प्रियंका बेसुध हो गईं। मां कमलेश और बहन अर्चना का बुरा हाल हो गया। पिता वीरपाल ने किसी तरह आंसू रोके। लेकिन बहू और पोते की हालत देखकर वे आंसुओं का सैलाब चाहकर भी रोक न सके। पूरा दिन सिसकियों-चीत्कार में बीता।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
वहीं आंसू सूखते नहीं कि किसी अपने के आ जाने पर फिर से बहने लगते। एक-एक पल परिवार पर कैसा बीता, ये न कोई बता सकता। न सोच सकता है।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार पूर्वाह्न 11:30 बजे अजय का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो फिर से चीख पुकार मच गई। दो दिन से चुप्पी लगाए बैठी मां कमलेश चीख पड़ी, मेरे बेटे का चेहरा तो दिखा दो। फिर कभी लौटकर नहीं आएगा, बस एक बार दिखा दो। बहन अर्चना भाई का चेहरा देखकर गिर पड़ी। बार-बार कहती रही कि लौटकर आ जा मेरे भाई।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
उधर, पिता ने एक क्षण तिरंगे में लिपटे बेटे को देखा तो सिसकारी फूट गई। बाहर आकर बोले, मैं नहीं देख सकता। पत्नी प्रियंका बेसुध थी। रोते-रोते पछाड़ खाकर गिर पड़ी।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
एक बार तो आजा मेरे लाल, बेटी का क्या होगा
प्रियंका की मां धर्मवीरी अजय की मां कमलेश से लिपटकर रोने लगी। सुबकते हुए बस इतना ही कहा कि एक बार तो अपने लाल से कह दो वापस आ जाए। मेरी बेटी का क्या होगा। उसके बच्चे का क्या होगा। दामाद के पार्थिव शरीर को देखकर ससुर सेवाराम और उनकी पत्नी धर्मवीरी फफकने लग गए। पूरा मंजर देखकर हर कोई रो पड़ा। कहीं मां अपने बेटे को याद करके रो रही थी तो कहीं पर महिलाएं बेसुध बहन और पत्नी को संभाल रहीं थीं।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
उम्र भर खलेगी अजय की कमी
दोपहर 12:40 बजे मुखाग्नि दी गई तो हाहाकार मच गया। किसी तरह पत्नी प्रियंका को महिलाएं वहां से लेकर आईं तो वो ग्राउंड में ही चक्कर खाकर गिर गईं।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
वहीं पानी डाला तो वे होश में आईं। सबने समझाया कि तेरा अजय देश के लिए शहीद हुआ है। उसने बड़ा नाम किया है। देख कितने लोग उसको सलामी देने आए हैं। कुछ क्षण आंख बंद करने के बाद प्रियंका ने बस इतना ही कहा वो तो चले गए। मैं तो अब बस जिंदा लाश। ये कहकर वो खड़े होने लगी। बस इतना कहा कि मुझे घर ले चलो। प्रियंका की ये हालत देखकर उनके भाई-बहन बिलख पड़े।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
इन 28 घंटों में जो दुख वीरपाल सिंह के पूरे परिवार ने सहा, वो खत्म नहीं हुआ। ये ऐसे जख्म हैं जो ताउम्र हरे होते रहेंगे। मंगलवार को जनसैलाब उमड़ा। लेकिन धीरे-धीरे फिर सब सामान्य हो जाएगा। इस परिवार को अजय कुमार की कमी उम्र भर सालती रहेगी। रुलाती रहेगी।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
उधर, पुलवामा में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद मेरठ के गांव बसा टीकरी उर्फ बसी टीकरी के लाल अजय कुमार की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।

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martyr ajay kumar
मंगलवार दोपहर गांव पतला के आईटीआई कालेज के मैदान में शहीद को अंतिम विदाई दी गई तो देशभक्ति के नारों से आसमान गूंज उठा। हर किसी के चेहरे पर गम और आंखों में पाकिस्तान के खिलाफ गुुस्से की आग दिखाई दी।

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martyr ajay kumar - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर मेरठ के प्रभारी मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री सत्यपाल सिंह, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, रालोद महासचिव जयंत चौधरी, सांसद कांता कर्दम, विधायक संगीत सोम के अलावा पुलिस, प्रशासन व सेना के जवानों ने श्रद्धांजलि दी।

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martyr ajay kumar
जानी क्षेत्र के गांव बसा टीकरी निवासी वीरपाल सिंह के पुत्र सेना के जवान अजय कुमार रविवार रात पुलवामा में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।

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martyr ajay kumar
वहीं सोमवार रात उनका पार्थिव शरीर मेरठ के सैनिक अस्पताल में लाया गया था। यहां से मंगलवार सुबह आठ बजे सेना के जवानों और आर्मी बैंड के साथ पूरा काफिला गांव बसा टीकरी के लिए रवाना हुआ।

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martyr ajay kumar
पूर्वाह्न 11:30 बजे यह काफिला उनके घर पहुंचा जहां भारी हुजूम जमा हो चुका था। रास्ते भर शहीद के पार्थिव शरीर पर फूलों की वर्षा होती रही। जगह-जगह लोगों ने काफिले को रोककर श्रद्धांजलि दी।

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martyr ajay kumar
इसके बाद घर से शहीद अजय की अंतिम यात्रा आईटीआई कॉलेज पतला के लिए रवाना हुई। लगभग डेढ़ किमी की इस दूरी में इस कदर भीड़ उमड़ रही थी कि सेना, पुलिस व ग्रामीणों को व्यवस्था बनाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा।

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martyr ajay kumar
वहीं बसा टीकरी गांव के अलावा मेरठ शहर और आसपास के गांवों से जनसमूह उमड़ आया। आईटीआई मैदान इससे पहले ही खचाखच भर चुका था।
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
मासूम आरव ने दी मुखाग्नि
दोपहर करीब एक बजे अजय के ढाई वर्षीय पुत्र आरव ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ आदि जयघोषों से आसमान गूंज उठा। 

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