1992 बैच के पीपीएस अफसर डॉ. बीपी अशोक
पुलिस विभाग के विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रशिक्षण के दौरान वह सब सिखाया जाता है कि किस स्थिति में क्या किया जाए। भीड़ चाहे जाम लगाए, धरना दे या फिर उपद्रव करे। भीड़ कम हो या अधिक, हमेशा पुलिस को माहौल भांपकर काम करना चाहिए। नहीं तो जरा सी लापरवाही से स्थिति बिगड़ती चली जाती है।
1992 बैच के पीपीएस अफसर डॉ. बीपी अशोक वर्तमान में यहां एसपी क्राइम तैनात हैं। इससे पहले वह लखनऊ, आगरा और मेरठ में ही एसपी सिटी रह चुके हैं। विशेषज्ञ के तौर पर उनका कहना है कि कानून व्यवस्था को देखते हुए करीब ढाई दशक हो गए। सामने कितनी भी भीड़ हो, पुलिस ट्रेनिंग का पार्ट न भूलें। भीड़ की स्थिति भांप लेना चाहिए। भीड़ की कैसी स्थिति है, यह मौके पर पहुंचते ही समझ लेना चाहिए। मोबाइल या वायरलेस सेट से उच्च अधिकारियों को जरूर जानकारी दें। जितनी जल्दी हो फोर्स को मौके पर बुलाएं। चाहे थाना प्रभारी या चौकी इंचार्ज हो या अन्य कोई भी पुलिस अफसर, पुलिस की गाड़ी में सुरक्षा उपकरण जैसे डंडे, हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर जैकेट जरूर होनी चाहिए।