सोमवार तड़के के चार बजे थे। इश्तियाक ने विवाहित बहन शबनम को फोन किया। बोला, शायरा (पत्नी) और बेटी (अनम) को साथ लेकर अल्लाह के पास जा रहा हूं। बस बेटा आरिश बचा है, उसका ध्यान रखना। अलमारी में और कुछ पैसे मेरी जेब में हैं, वो बेटे को दे देना। इतना सुनकर शबनम परेशान होकर बोली कि इश्तियाक कोई गलत कदम मत उठा लेना। लेकिन वह फोन काट चुका था। शबनम ने वापस कॉल की। लेकिन फोन स्विच ऑफ मिला। शबनम ने दूसरे भाई आरिफ को कॉल कर इसके बारे में बताया। आरिफ को यकीन नहीं आया। लेकिन फिर उसने पिता अलीहसन को इसके बारे में बताया। शबनम अपने पति रियाज को लेकर बाइक से मुरादनगर से मेरठ के लिए निकल गई। अलीहसन भी एक रिश्तेदार को लेकर सुबह करीब 4:45 बजे इश्तियाक के घर पहुंचे। अंदर से दरवाजा बंद था। अलीहसन व रिश्तेदार ने दरवाजा तोड़ दिया। जहां पर एक कमरे की चौखट पर इश्तियाक का शव लटका हुआ था।