सुरेश
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गली में मोहम्मद सुहैल की दुकान है। वह भी मजार की साफ-सफाई करते हैं। वहां धूप भी जलाते हैं। कहते हैं, यहां कोई भेदभाव नहीं है।
सुनील गुप्ता कहते हैं, बचपन से मंदिर और मजार को ऐसे ही देखा। शनिवार को भैरों बाबा के मंदिर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। उनमें से कई लोग मजार पर आकर दीप जलाते हैं।
मनोज कुमार की गजक की दुकान है। कहते हैं, सीजन में जो भी नई चीज बनाते हैं, पीर मिट्ठा के मंदिर और मजार पर चढ़ाते हैं। हमारी दुकान 100 साल पुरानी है। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।