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तस्वीरें बनीं गवाह: स्ट्रेचर में ताले... मरीज हाथों के हवाले, लिफ्ट पड़ी खराब, चौंका देगा मेडिकल कॉलेज का हाल

Fri, 06 Oct 2023 02:32 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

Meerut News : मेडिकल कॉलेज में हर रोज सैकड़ों लोग इस परेशानी से दो-चार होते हैं। तीमारदार मरीजों को गोद में या हाथों के सहारे ले जाते हैं। मेडिकल में मरीजों को लिफ्ट और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज का हाल। - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में जागृति विहार के बाबूराम को रक्त की जांच के लिए द्वितीय तल पर जाना था, लेकिन न लिफ्ट चल रही है और न ही स्ट्रेचर मिला। बीमार होने के बावजूद उन्हें सीढ़ियों के जरिये द्वितीय तल पर जाना पड़ा।

बता दें कि यह परेशानी अकेले बाबूराम की नहीं है। यहां हर रोज सैकड़ों लोग इस परेशानी से दो-चार होते हैं। तीमारदार मरीजों को गोद में या हाथों के सहारे ले जाते हैं। मेडिकल में मरीजों को लिफ्ट और स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
यहां लिफ्ट सालों से खराब पड़ी हैं। मेडिकल में मरीज को भूतल से प्रथम तल या फिर द्वितीय और तृतीय तल पर ले जाना पड़े तो रैंप और सीढ़ियां ही सहारा हैं। मरीज को शिफ्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर में ताले लगे रहते हैं। मरीज को अगर स्ट्रेचर चाहिए तो उसे पहले आधार कार्ड जमा करना पड़ता है, फिर उसे स्ट्रेचर मिलता है। स्ट्रेचर मिल भी जाए तो तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ता है। वार्ड ब्वॉय या स्टाफ उन्हें ले जाने की जहमत नहीं उठाते।

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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर रोज तीन से साढ़े तीन हजार मरीज आते हैं। 500 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं।

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लिफ्ट पड़ी खराब। - फोटो : अमर उजाला
लिफ्ट को जल्द ही ठीक कराया जाएगा। स्ट्रेचर पर्याप्त हैं, मगर कई बार मरीज स्ट्रेचर को इधर-उधर छोड़ देते हैं। इस कारण स्ट्रेचर लॉक कर रखे हुए हैं। जरूरत पर मरीज को दिए जाते हैं। मेडिकल में जो कमियां हैं उनमें सुधार किया जा रहा है। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज

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