बेबसी... लाचारी... आंखें नम और लब खामोश। अपना दर्द कैसे बयां करें, अल्फाज भी नहीं मिल रहे हैं। कोरोना ने लोगों को ऐसा दर्द दिया है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसी टीस है, जो जब जिक्र करो उभर आती है। आंखों में पानी बनकर और दिल में दर्द बनकर। कोरोना काल में काफी लोग अपनों से बिछुड़ गए। कई परिवार अपनों को अंतिम कंधा तक नहीं दे पाए। कुछ लोग अन्य बीमारियों का इलाज न मिलने के कारण अपनों के बीच से चले गए। एक साल बीतने के बाद भी लोग कोरोना से मिले जख्मों को भुला नहीं पा रहे हैं। कोरोना का संक्रमण एक बार फिर बढ़ रहा है। काफी हद तक इस पर नियंत्रण हो जाने के बाद लोगों को लगने लगा था कि अब शायद महामारी से मुक्ति मिल जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर हम जागरूक नहीं होंगे तो इसके परिणाम बड़े घातक होंगे। पढ़िए अरीश रिजवी की ये खास रिपोर्ट-