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जनता कर्फ्यू का एक साल: मेरठ में हर तरफ था सन्नाटा... सूनी पड़ी थीं सड़कें, आखिर कितना कम हुआ डर, देखिए तस्वीरें

Mon, 22 Mar 2021 01:02 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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जनता कर्फ्यू का एक साल पूरा हो गया। - फोटो : अमर उजाला
कोरोना को एक साल हो रहा है। 22 मार्च, 2020 को जनता कर्फ्यू था और 24 मार्च, 2020 की रात 12 बजे से कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन लगाया गया था। 27 मार्च को मेरठ में कोरोना का पहला मरीज मिला था। महाराष्ट्र के अमरावती से आए क्रॉकरी कारोबारी इकरामुल हक पहले मरीज थे, जिन्हें कोरोना की पुष्टि हुई थी। वह शास्त्री नगर में अपने रिश्तेदार के यहां आए थे। इसके बाद एक-एक कर मरीजों की संख्या बढ़ती रही और वायरस ने महामारी का रूप ले लिया। लोग घरों में कैद होकर रह गए। ऑफिस, दुकानें, मॉल और शोरूम, सब बंद हो गए।
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लॉकडाउन मेरठ - फोटो : amar ujala
शहर में एक अप्रैल को कोरोना से पहली मौत हुई, फिर मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया। दूसरी तरफ, कोरोना योद्धाओं ने जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज शुरू किया। घरों को सैनिटाइज किया। कोरोना वॉरियर्स लोगों की मदद के लिए आगे आए। नया साल आते-आते कोरोना की रफ्तार कम हो गई, पिछले कुछ दिनों से कोरोना फिर से पैर पसारने लगा है। उम्मीद है...इस बार भी जीतेंगे।
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लॉकडाउन मेरठ - फोटो : amar ujala
एक साल बाद भी कोरोना से जंग जारी है। नए साल में कोरोना कम जरूर हुआ, लेकिन खत्म नहीं हुआ। कोरोना को हराने के लिए एहतियात की जरूरत है, क्योंकि कोरोना फिर से पैर पसार रहा है। मेरठ जिले में अब तक 9 लाख 80 हजार 328 लोगों की कोरोना की जांच हो चुकी है। इनमें 21 हजार 500 लोगों को कोरोना की पुष्टि हुई है, जबकि इनमें से 409 लोगों की मौत हो चुकी है। 20 हजार 989 लोग कोरोना को हरा चुके हैं। नौ लाख 58 हजार 841 लोग ऐसे रहे जिनकी कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई। 

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लॉकडाउन मेरठ - फोटो : amar ujala
कोरोना से मौतों के मामले में मेरठ का प्रदेश का तीसरा स्थान है। उससे ऊपर लखनऊ और कानपुर नगर हैं। मरीजों के मामले में सातवां स्थान है। अब कोरोना को हराने का शस्त्र भी मिल चुका है, वैक्सीन। 90 हजार से ज्यादा लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लग चुका है, जो उन्हें सुरक्षा देगी। फिलहाल बुजुर्गों और बीमार लोगों पर फोकस है। इस महामारी ने जहां दर्द दिया है, परेशान किया, वहीं सीख भी दी है, हिम्मत और हौसले से जीने की। कभी न हार मानने की। सलाह दी है, लापरवाही न बरतने की, एहतियात और अनुशासन के साथ जिंदगी जीने की।
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मेरठ में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
लापरवाही न बरतें
अब पिछले साल जैसे हालात नहीं हैं। तब महामारी नई थी, किसी को पता नहीं था, कैसे अंकुश लगाना है। अब एक साल का अनुभव है, मिसाल के लिए कोरोना को हराने वाले और इलाज करने वाले योद्धा हैं, लेकिन लापरवाही भारी पड़ सकती है। - डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ 
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मेरठ में चार माह की बच्ची ने कोरोना को हराया - फोटो : अमर उजाला
हिम्मत नहीं हारी
हिम्मत और हौसला ही था कि कोरोना जैसी बीमारी से भी जीत गए। शुरू में तो रात-रात भर जागते थे, अचानक मौत की खबर आ जाती थी, हिम्मत टूटने सी लगती थी। फिर नई हिम्मत के साथ लड़ाई शुरू करते थे। - डॉ. राजकुमार, संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य 
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डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
पूरी है तैयारी
कोरोना की प्रकृति पूरी तरह से अभी समझ नहीं आई है। ठंड के मौसम में कोरोना के मरीज बढ़ने का कयास थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं गर्मियों में कोरोना घटने के कयास लगाए, लेकिन तब बढ़ गया था। मेडिकल कॉलेज किसी भी लड़ाई के लिए तैयार है। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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