तमाम विरोध-बयानों के बाद अब पूरे मेरठ जोन में भी कांवड़ मार्ग पर ढाबों-खाने पीने की दुकानों के बाहर मालिकों-कर्मचारियों के नाम लिखे जाएंगे। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि एडीजी के आदेश का पालन कराया जाएगा। खतौली से मोहिउद्दीनपुर तक, शहर में हापुड़ रोड और दूसरे मार्गों पर सभी जगह आदेश का पालन कराया जाएगा। वहीं कुछ लोग इसके समर्थन तो कुछ विरोध में उतर आए हैं। शनिवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने नाम लिखे पोस्टरों के साथ कमिश्नरी पर सब्जियां बेचकर विरोध जताया।
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कांवड़ यात्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
22 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा
22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। इससे पहले ही सभी ढाबों-खाने-पीने की दुकानों के बाहर मालिकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के नाम लिखे जाएंगे। जिससे कांवड़ियों को पता रहे कि जिस होटल-दुकान से वह खाने-पीने का सामान ले रहे हैं, उसका मालिक और कर्मचारी कौन है। इससे पिछली बार मुजफ्फरनगर में हुए विवाद जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। दुकानोंं के बाहर नाम लिखने के मामले में लोगों की अलग-अलग राय है।
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आप कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी के नेतृत्व में तमाम पदाधिकारी कार्यकर्ताओं ने कमिश्नर पार्क पर एकत्र होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रशासन मुजफ्फरनगर द्वारा पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान फलों, सब्जियों व चाय की दुकान लगाकर उस पर अपना नाम, अपनी जाति, अपना धर्म लिखकर प्रदर्शित कर विरोध प्रदर्शन किया। कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लोग पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, माइनॉरिटी के लोगों से नफरत करते हैं। उनका सामाजिक व आर्थिक रूप से बहिष्कार करना चाहते हैं।
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आप कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
सरकार और जिला प्रशासन दुकानें बांट देगा लेकिन गंगा जमुनी तहजीब नहीं बंटेगी: अंकुश चौधरी
अंकुश चौधरी ने कहा कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिया है। ये वही लोग हैं जो दलित राष्ट्रपति को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देते, इनकी यही मानसिकता है जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी,जो कि पिछड़ी जाति से आते हैं। उनके मंदिर में प्रवेश के बाद गंगाजल से धुलवाते हैं, तो क्या भाजपाई चाय, पकौड़ी, पूरी, सब्जी, फल, चाय बेचने वाले वाल्मीकि, जाटव, खटीक, यादव, दलित, मुसलमान दुकानदारों से सामान खरीदेंगे, नहीं बल्कि दुकान में तोड़-फोड़ कर उसको बंद करा देंगे।
जो अयोध्या हारते ही वहां के हिंदुओं के बहिष्कार की वकालत करने लगे थे। दलित सांसद अवधेश पासी के लिए अपशब्द बोलने लगे थे। ये जान लिजिए गरीब का बॉयकॉट करने वाला प्रशासन और डरपोक सरकार सिर्फ और सिर्फ अपनी विफलताएं छिपाने के लिए इस तरह की नफरत फैलाते हैं। लेकिन हमारा देश मोहब्बत का देश है। आपसी भाईचारे का देश है, यह नफरत को बार-बार हरा देता है। नफरत का बाजार मत लगाइए, फल रहमान बेचे या राहुल बस मीठा होना चाहिए।
अंकुश चौधरी ने कहा भाजपा समर्थक और उनका जिला प्रशासन दुकानें तो बांट देगा लेकिन गंगा जमुनी तहजीब को आपसी भाईचारे को कैसे बांटेगा? आपसी प्यार मोहब्बत को कैसे बटेगा? देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है। अबतो खुद एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने खुलकर इसका विरोध किया है।