जांच में जुटी फोरेंसिक टीम
- फोटो : Amar Ujala Meerut
जिस नशा मुक्ति केंद्र में रोहित का इलाज चल रहा था, वह अवैध निकला। इसके पास केंद्र का पंजीकरण, अग्निशमन के यंत्र, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बॉयोवेस्ट मेडिकल मद्यनिषेध विभाग की एनओसी नहीं मिली। इन मरीजों को देखने के लिए कोई डॉक्टर भी नहीं आता था। मरीजों का इलाज घर के लोग ही कर रहे थे। शिवम ने घनी आबादी के बीच अपने ही घर की दूसरी मंजिल पर नशा मुक्ति केंद्र बनाया था, जहां पर मरीजों का इलाज होता था।
घनी आबादी के बीच शिवम गुर्जर घर पर बोर्ड लगाकर नशा मुक्ति केंद्र चला रहा है। जहां रोहित, अनूप और संदीप का इलाज चल रहा था। रोहित की हत्या के बाद इस नशा मुक्ति केंद्र की पोल खुली। पुलिस को नशा मुक्ति केंद्र के संचालक शिवम गुर्जर की मां विमलेश ने बताया कि तीनों मरीज अपना खाना खुद बनाते थे। उनको खाने का सामान शिवम देता था व उसकी अनुपस्थिति में वह खुद भी दवाइयां दे देती थी।