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कोरोना योद्धाओं के सम्मान में मेरठ में दो स्थानों पर सेना ने किया बैंड डिस्प्ले, मिलिट्री बैंड के बारे में नहीं जानते होंगें ये खास बातें

Sun, 03 May 2020 10:51 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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बैंड डिस्प्ले करते सेना के जवान - फोटो : amar ujala
कोरोना की लड़ाई में योद्धाओं की हौसला अफजाई करने के लिए सेना भी आगे आई। चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ जनरल बिपिन रावत के निर्देश के बाद रविवार को मेरठ में भी दो स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें सेना ने योद्धाओं का सम्मान करते हुए बैंड डिस्प्ले किया।

पश्चिमी यूपी सब एरिया हेडक्वार्टर में आरवीसी ने बैंड डिस्प्ले किया। इस मौके पर जीओसी मेजर जनरल पीके साई मौजूद रहे। आरवीसी के बैंड ने सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा.., कदम-कदम बढ़ाए जा..., मेरा मुल्क मेरा देश और राष्ट्रगान की धुन बजाकर उत्साहवर्धन किया। वहीं, कैंट बोर्ड सफाई कर्मचारी, मिलिट्री अस्पताल के स्टाफ, सीएमओ, सदर बाजार पुलिस को भी सम्मानित किया।
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बैंड डिस्प्ले करते सेना के जवान - फोटो : amar ujala
इस दौरान मेजर जनरल पीके साई ने कहा कि हमे इस लड़ाई का भी डटकर सामना करना है। सभी एकजुट होकर इस लड़ाई में अवश्य जीतने जा रहे है। वहीं, दूसरी ओर पुलिस लाइन में स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गयी। यहां डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर अनमोल सूद मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कोरोना योद्धाओं के साथ सेना साथ खड़ी है। जैसे हम बॉर्डर पर देश की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे ही कोरोना योद्धा भी आगे बढ़कर समाज को बचाने में जुटे हैं।

छह से सात रेजिमेंटल बैंड मौजूद
मेरठ में सेना के छह से सात रेजिमेंटल बैंड हैं। इन्हीं बैंड के माध्यम से सेना के जवान डॉक्टरों को सम्मान देने आए। आमतौर पर सेना के बैंड अपने आधिकारिक कार्यक्रम में ही प्रदर्शन करते हैं।
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miltary band, army band - फोटो : amar ujala
सेना का बैंड इसलिए महत्वपूर्ण
युद्ध और संगीत यूं तो एक दूसरे के विपरीत बातें हैं लेकिन जो संगीत एक तरफ रूह को सुकून देता है। वहीं, जंग के मैदान में दुश्मन के खिलाफ जवानों में कुछ कर गुजरने के भाव भी भर देता है। युद्ध के मैदान में बजने वाला संगीत जवानों में अपने वतन के लिए प्रेम और मर-मिटने का जज्बा पैदा करता है।

हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान होने वाली बीटिंग रिट्रीट हर देशवासी का मन मोह लेती है। बीटिंग रिट्रीट में भारतीय सेना के तीनों अंगों के मिलिट्री बैंड एक साथ भारत के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। ऐसा पहली बार है जब सेना ने देशहित में कोरोना महामारी से लड़ रहे योद्धाओं को इस प्रकार सम्मान व्यक्त किया हो। 

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बैंड डिस्प्ले करते सेना के जवान - फोटो : amar ujala
भारतीय मिलिट्री बैंड की खूबियां
भारतीय मिलिट्री बैंड की कहानी 300 साल पुराने ब्रिटिश मिलिट्री बैंड के इतिहास से जुड़ी हैं। ब्रिटिश राज खत्म होने पर कमांडर इन चीफ, फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने 1950 में मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में ‘मिलिट्री स्कूल ऑफ म्यूजिक’ की नींव रखी।

इसे ‘नेलर हॉल ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। यही वह समय था जब भारतीय धुनों पर आधारित हिंदुस्तानी मिलिट्री बैंड को आकार दिया गया।

 
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बैंड डिस्प्ले करते सेना के जवान - फोटो : amar ujala
भारतीय लोकगीतों से ली गईं हैं बैंड की धुनें
भारतीय मिलिट्री बैंड की ज्यादातर धुनें लोक कथाओं पर आधारित हैं। प्राचीन युद्ध और हिंदुस्तानी संगीत की परंपराओं में रची-बसी और विदेशी वाद्य यंत्रों पर बजाई गई धुनें, भारतीय मिलिट्री बैंड की खासियत हैं।

मिलिट्री बैंड द्वारा बजाई जाने वाली धुनें बैंड मास्टरों ने पंजाब, राजस्थान, मारवाड़, गढ़वाल और कोंकण के लोकगीतों से ली हैं। इनमें वीर गोरखा का किस्सा, कोंकण सुंदरी की कहानी, अल्मोड़ा-मार्च, चन्ना-बिलौरी की गाथा, पटनी टॉप के गीत-गाथा आदि शामिल हैं।
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बैंड डिस्प्ले करते सेना के जवान - फोटो : amar ujala
प्रोफेसर ए लोबो ने रचा प्रसिद्ध संगीत
भारतीय मिलिट्री बैंड की धुनें प्रत्येक आयोजन के हिसाब से तैयार की जाती हैं। मिलिट्री म्यूजिक के कंपोजीशन में मेजर रॉबर्ट्स और हैरोल्ड जोसेफ, एलबी गुरंग, जनरल निर्मल चंद्र विज और मेजर नाजिर हुसैन जैसे अफसर सबसे आगे थे।

इन्होंने विभिन्न मौकों के हिसाब से अलग-अलग धुनें तैयार कीं, जिनमें राष्ट्रीय उत्सवों पर अक्सर बजाई जाने वाली क्विक मार्च कैटेगरी की धुन-‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ भी शामिल है। प्रोफेसर ए लोबो ने इसका संगीत दिया। 
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