मेरठ शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर जॉनी क्षेत्र के सिसौला बुजुर्ग गांव में लोगों ने फुटबॉल बनाने के लिए सुई क्या उठाई, उनकी जिंदगी बदलती चली गई। एक घर से शुरू हुआ काम, अब पूरे गांव में फैल गया और रोजगार का बड़ा जरिया बन गया है। 12 हजार की आबादी वाले गांव में करीब 2500 लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं। हर महीने यहां पर डेढ़ से दो लाख फुटबॉल बनाई जाती हैं, जबकि साल भर में 20 लाख से ज्यादा फुटबाल तैयार हो जाती हैं। ये करीब 15 करोड़ रुपये में बिकती हैं।
गांव के शौर्य स्पोर्ट्स कारखाने के मालिक मुकेश कुमार खुद कारीगर भी हैं। उनका कहना है कि फुटबॉल और वॉलीबॉल दिल्ली, कोलकाता और मेरठ में सप्लाई करते हैं। सरकारी मदद के बिना ही इस काम को कर रहे हैं। पिता चंद्रभान की कोरोना काल में मृत्यु हो गई। अब वह भाई विकास के साथ मिलकर इस काम को कर रहे हैं।