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बेटियों ने बदले वैलेंटाइन के मायने, आपको भी प्रेरित कर देंगी ये तीन कहानियां...

Fri, 08 Feb 2019 06:41 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर की ऐसी बेटियां भी हैं, जिन्होंने अपने कॅरियर को ही पहला प्यार बनाया। इनका पार्टनर बनीं इनकी किताबें, जिनके जरिये इन्होंने मेहनत कर सफलता हासिल की। कॅरियर की तरफ ध्यान देने से कोई धोखे का खतरा भी नहीं है। साथ ही भविष्य भी उज्जवल हो जाता है। बेटियां आत्मनिर्भर तो बनती ही हैं, अपने परिवार के लिए सहारा भी बन ही जाती हैं। 

इन बेटियों में से कोई सीए बना, तो किसी ने कूची थामकर चित्रकारी की दुनिया में कदम रखा। इन बेटियों ने सही दिशा में फोकस करके अपने कॅरियर को चमकाया और साबित किया कि ये भी किसी से कम नहीं हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कॅरियर से किया पहला प्यार
- गुलाब देकर युवाओं ने मनाया रोज डे 

गुरुवार को वैलेंटाइन वीक का आगाज़ रोज़ डे से हुआ। युवाओं ने एक दूसरे को गुलाब देकर दोस्ती का इजहार किया। बाजार में गुलाब तीन गुना दामों में बिका। 15 रुपए वाली स्टिक को फूल विक्रेताओं ने 30 रुपए तक बेचा। लाल, गुलाबी ही नहीं पीले, सफेद गुलाब की भी काफी मांग रही। आर्टिफिशियल गुलाब भी खूब खरीदे गए।
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यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
नुपूर चौधरी, युवा चित्रकार 
नेशनल पेंटिंग एग्जीबिशन दिल्ली में अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगा चुकीं युवा चित्रकार नुपूर चौधरी कहती हैं कि कॉलेज में दोस्त मुझ पर हंसते थे, जब मैं कहती थी कि मेरा कॅरियर ही मेरा क्रश है। दिल्ली रोड निवासी नुपूर स्कूल दिनों से ही अच्छी पेंटिंग करती थीं, सपना पेंटर बनना था। नुपूर कहती हैं वो वैलेंटाइन डे बहुत अच्छे से याद है जिस दिन मैंने सोचा कि मुझे अपने पहले प्यार चित्रकारी में सफलता हासिल करनी है। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं इसी में अपना कॅरियर बनाऊंगी। मेरा मकसद नेशनल एग्जीबिशन में अपनी पेंटिंग्स को एग्जीबिट करना था। 2018 में जब दिल्ली कलावीथिका में मेरे चित्रों की प्रदर्शनी लगी वो दिन जिंदगी का सबसे खुशी का दिन था।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने पार्टनर मैंने पेंटिंग्स को किया प्रपोज
- गीतिका, युवा चित्रकार
 
पेंटिंग्स बनाकर ऑनलाइन सेल करने वालीं गीतिका कहती हैं जरुरी नहीं प्यार किसी पार्टनर से हो, अपने कॅरियर से प्यार करके देखिए बहुत मजा आएगा। सुभारती फाइन आर्ट कॉलेज से पेंटिंग की पढ़ाई करके अब चित्रकारी को अपना कॅरियर बना चुकीं गीतिका कहती हैं बारहवीं क्लास में थी तब पता चला कि वैलेंटाइन डे और रोज डे भी कुछ होता है। शायद वो 2015 की बात है क्लास की कई लड़कियाें के हाथ में उस दिन लाल गुलाब था तब मुझे लगा कि एक नया इंसान आपके माता-पिता से बढ़कर कैसे आपकी जिंदगी का हिस्सा बन सकता है। इससे बेहतर है कि पैरेंट्स को प्रपोज कर दूं। तभी मैंने सोचा कि मैं अपनी पेंटिंग्स को प्रपोज करुंगी। मैं भी घर लौटते वक्त गुलाब खरीदकर घर ले गई और मम्मी को देते हुए कहा मम्मी मुझे पेंटर बनना है क्या आप मेरा ये प्रपोजल स्वीकार करेंगी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सीए बनने के सपने से लगाया दिल
- ज्योति, स्टूडेंट 

परीक्षितगढ़ निवासी ज्योति ने यूपी बोर्ड के स्कूल से इंटर की पढ़ाई की है। ज्योति ने चार्टड अकाउंटेंट बनने का ख्वाब देखा। ज्योति कहती हैं सुना था कि लोगों को मोहब्बत में नींद नहीं आती, ऐसा कुछ मेरे सीए बनने के सपने से भी हुआ। डीएन डिग्री कॉलेज से स्नातक के दौरान ही सीए क्या होता है यह मुझे पता चला। चूंकि पहले से यह तय नहीं था कि कॅरियर में क्या बनना है। जब सीए का पता चला तो मैं सीए बनने के लिए दिनरात एक करके पढ़ाई करनी शुरू कर दी। परीक्षितगढ़ से रोजाना मेरठ तक कोचिंग, कॉलेज, ट्रेनिंग के लिए आती, अपडाउन करती। इस दौरान तमाम मुश्किलें भी हंसते हुए उठाती गई। जनवरी में जब रिजल्ट आया और सीए बनने की सूचना मिली तो ऐसा लगा कि मैंने अपना प्यार पा लिया। इतनी खुशी किसी और को पाने से नहीं होती जितनी खुशी मुझे मेरी इस सफलता से मिली।

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