आरोपी विकास जैन गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी तरीके से बनाई गई फर्मों के जरिए फर्जीवाड़ा चल रहा है। ऐसी फर्मों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्होंने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम लिया है। इसके अलावा वह फर्में भी रडार पर हैं, जो जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गई हैं। इसके पीछे सबसे खास वजह यह है कि पांच करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है। वहीं अधिकारियों का मानना है कि टैक्स चोरी रोकने के लिए जालसाजों को जेल भेजा जाना जरूरी है। जिन फर्मों को रडार पर लिया गया है, उनमें से कई के बैंक खाते आईटीसी क्लेम लेने के बाद बंद हो गए।