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मोबाइल से लेकर नशे की डोज तक, इन खुफिया तरीकों से जेल में बंद कैदियों तक पहुंचाया जाता है हर सामान

Wed, 11 Sep 2019 05:44 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मुजफ्फरनगर जेल - फोटो : अमर उजाला
जेल में कैदियों को कुछ भी सामान पाना आसान है, बशर्ते उनके पास पैसा हो। बागपत में जिला कारागार में मिली वाई-फाई डिवाइस और मोबाइल इसका सबसे ताजा उदाहरण हैं। यह केवल यूपी की एक जेल का मामला नहीं है बल्कि ज्यादातर जेलों का यही हाल है। यहां तक कि कई जेलों में कैदियो से मुलाकात के भी रेट फिक्स हैं। कुख्यात अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे ही उनकी एक मांग पर हर सामान मुहैया हो जाता है और जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती। आगे जानें आखिर किन-किन तरीकों से कैदियों के पास पहुंचती है चीजें

 
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जेल दिखाता कैदी - फोटो : अमर उजाला
पैसे देकर कैदी कुछ भी मंगा सकते हैं। ये कहना है झांसी जिला कारागार में कैदियों से मिलने आए उनके रिश्तेदारों का। वे यह भी मानते हैं कि अगर इसकी शिकायत करेंगे तो जेल में कैद उनके रिश्तेदारों को परेशानी होगी। यहां जिला कारागार में बंद अपने पति से मिलने आई एक महिला ने बताया कि मिलाई पर्ची यदि नहीं बने तो सौ रुपये देकर अंदर कैदी से मुलाकात हो जाती है।

वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि यहां तैनात सिपाहियों ने ही अपने स्तर से सामान अंदर ले जाने के रेट तय कर रखे हैं। किसी भी सामान को अंदर ले जाने के लिए प्रति नग दस रुपये देने पड़ते हैं। चाय पत्ती के बीस रुपये, सब्जियों के बीस रुपये प्रति किलो देना होता है। गुटका, बीड़ी, सिगरेट, पान, तंबाकू सब जेल के अंदर दो गुने रेट पर आसानी से मिल जाता है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो जेल प्रशासन ही जाने। 
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बागपत जिला जेल - फोटो : अमर उजाला
हाल ही में बागपत जिला कारागार में कमिश्नर आईजी समेत कई आला अधिकारियों ने अचानक निरीक्षण किया, जिसमें जिला कारागार में कई खामियां मिली यहां कैदी स्मार्टफोन का इस्तेमाल तक कर रहे थे। यही नहीं यहां वाई फाई डिवाइस भी बरामद की गई जिसे दो फुट गहरे गढ्ढे में दबाया गया था। यानी कुख्यात अपराधी भले ही सलाखों के पीछे बंद हों लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह एक्टिव हैं। 

जांच में यह भी सामने आया कि स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले कैदी व्हाट्सएप कॉल के जरिए अपने शार्गिदों से संपर्क साध रहे थे।  इसके अलावा सनसनीखेज खुलासा यह भी हुआ कि कैदियों के पास वाई फाई डिवाइस दिल्ली निवासी प्रमोद ने भेजी थी। वह एक हत्या के मामले में जेल में बंद अपने मामा की पैरवी कर रहा था। उसने फलों के बीच में डिवाइस को रखकर अपने मामा तक पहुंचा दिया। इस डिवाइस से दस मोबाइल फोन कनेक्ट बताए गए थे और जेल प्रशासन कई माह से इस बात से बेखबर था। 

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बागपत जेल - फोटो : अमर उजाला
आपको जानकर हैरानी होगी कि जेल में कैदियों को नमकीन बिस्कुट भेजने के बहाने आपत्तिजनक सामान तक भेजा जाता है। इसी वर्ष मुजफ्फरनगर जेल प्रशासन उस वक्त जांच के घेरे में आ गया जब एक युवक को महज पांच सौ रुपये में नशीली गोलियां व मोबाइल अंदर ले जाने के आरोप में पकड़ा गया। मुजफ्फरनगर जिला कारागार में 11 मई 2019 को यह युवक मनीष मिलाई के दौरान नमकीन के पैकेट में नशे की गोलियां और चप्पल में छिपाए गए मोबाइल के साथ पकड़ा गया था।

युवक जेल में बंद अपराधी आबिद उर्फ काला से मिलाई करने के लिए पहुंचा था। युवक को यह सभी सामान जेल में पहुंचाने के लिए महज पांच सौ रुपय दिए गए थे। इंस्पेक्टर संतोष कुमार के अनुसार युवक इससे पहले भी केलों के भीतर आपत्तिजनक सामान छिपाकर जेल में पहुंचा चुका था। इस दौरान युवक ने अन्य साथी का भी नाम बताया था जो मूंगफली के भीतर ड्रग्स रखकर जेल के भीतर कैदियों तक पहुंचाता था। 
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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी - फोटो : file photo
किसी को शक नहीं, जेल में चलते हैं मोबाइल 
पुलिस की जांच और कई बार छापेमारी में सामने आ चुका है कि जेल में मोबाइल चलते हैं। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद से सबसे पहले जिला कारागार से ही सोशल मीडिया पर बजरंगी का फोटो वायरल किया, इससे जाहिर है कि जेल में भी मोबाइल चल रहे हैं। इसके अलावा कई बार मोबाइल बरामद हो चुके हैं। 
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जेल से भी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं अपराधी - फोटो : अमर उजाला
अभी तक नहीं मिला बागपत जेल का मोबाइल
बागपत जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के बाद से पुलिस और जेल अफसर अभी तक जांच में ही जुटे हैं। जांच में क्या चल रहा है। कितनी कामयाबी अभी तक की भागदौड़ से मिल पाई है। किन प्रदेशों के अफसरों से सहयोग लिया जा रहा है इस पर कुछ भी बोलने के लिये कोई तैयार नहीं है। जांच चल रही है। जिस मोबाइल से फोटो वायरल किए गए हैं, वह भी अभी तक नहीं मिला है।
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