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बड़ा सवाल: आखिर कहां से आए कागज और स्याही, अफसरों के हाथ नहीं लगा कोई ठोस सुराग

Wed, 26 Aug 2020 12:28 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग (एसजीएसटी) के पास अभी कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। खुलासे के पांच दिन बाद भी यह पता नहीं चल सका है कि नकली किताबें छापने के लिए कागज और स्याही कहां से आ रही थी। अगर कागज और स्याही सप्लाई करने वाली फर्में जीएसटी विभाग में पंजीकृत हैं तो तभी जीएसटी लगाया जाएगा।
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एनसीईआरटी की फर्जी किताबों का मामला - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मंगलवार को एसजीएसटी अधिकारियों ने दोनों फर्मों की फाइलें खंगालीं। एसजीएसटी (एसआईबी) के एडिशनल कमिश्नर शशि भूषण सिंह ने बताया कि अनिता गुप्ता के नाम से टीएनएचके प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशन 22 जनवरी 2002 से पंजीकृत है। पहले फर्म वैट में थी और अब एक जुलाई 2017 से जीएसटी में पंजीकृत है। रिटर्न भी लगातार फाइल कर रहे हैं। मार्च का आखिरी रिटर्न 22 जुलाई 2020 को फाइल किया गया है। बाकी पिछले रिटर्न भी फाइल हुए हैं। वैट में पहले इनका पता विजय नगर वेस्टर्न कचहरी रोड का लिखा हुआ था। अब जीएसटी में मोहकमपुर का पता है। 
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नकली किताबों का गोदाम - फोटो : अमर उजाला
पता बदला तो बताया क्यों नहीं
एडिशनल कमिश्नर के अनुसार फर्म का पता तो बदला जा सकता है। लेकिन इसकी सूचना देनी होती है। जानकारी की जा रही है कि इन्होंने सूचना दी थी या नहीं। अगर सूचना नहीं दी और पता बदल दिया तो पेनल्टी लगेगी।

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नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा मेरठ सिक्योरिटी प्रेस के नाम से भाजपा नेता संजीव गुप्ता की फर्म भी जीएसटी में आठ सितंबर 2010 से रजिस्टर्ड है। इसका भी मोहकमपुर का पता है। दोनों फर्म सीजीएसटी में पंजीकृत हैं। हालांकि अब सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी दोनों की ही टीमें कार्रवाई कर सकती हैं। इसलिए एसजीएसटी पड़ताल कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्य आरोपी पकड़े नहीं गए हैं और जो गिरफ्तार किए गए हैं, उन्हें जानकारी नहीं है।
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नकली किताबों के गोदाम को सील करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
गोलाबढ़ में भी था नकली किताबों का गोदाम
भाजपा नेता संजीव गुप्ता का टीपी नगर के गोलाबढ़ में भी नकली किताबों का गोदाम था। बताया गया कि इस गोदाम को लॉकडाउन से पहले ही खाली कर एनसीईआरटी की नकली किताबें परतापुर के अच्छरौंडा गोदाम और अन्य जगहों पर भेजी गई थीं। पुलिस के अनुसार संजीव व सचिन गुप्ता के परतापुर के अलावा भी जिले में अन्य जगहों पर गोदाम बने थे, जहां एनसीईआरटी की नकली किताबें रखी जाती थीं।

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