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EXCLUSIVE रिपोर्ट: चौंका देगी प्राइमरी स्कूलों की ये सच्चाई, तस्वीरों से खुली पोल

Mon, 03 Dec 2018 03:25 PM IST
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की व्यवस्था पटरी से उतर गई है। सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बच्चों के पास पढ़ने के लिए न तो किताबें हैं और न ही उन्हें खाना समय से मिल रहा है। इसी वजह से स्कूलों में बच्चों की संख्या घटती जा रही है। तमाम शिकायतों के बाद भी अधिकारी मिड-डे मील बांटने वाले एनजीओ पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला की टीम ने शनिवार को बेसिक शिक्षा विभाग के कई स्कूलों में मिड-डे मील की स्थिति का जायजा लिया। कई स्कूलों में बच्चों को कई महीने से दोपहर का भोजन नहीं मिला। जहां पर दूध और खाना बांटा जा रहा था, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। गिनती के स्कूलों में मेन्यू के हिसाब से खाना मिला। जिले में 910 प्राथमिक विद्यालय और 434 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं और अधिकांश में व्यवस्था खराब है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
ग्राम प्रधान और प्रधानाचार्य में चल रही रार 

जिठोली प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को कई माह से मिड-डे मील नहीं मिला है। प्रधानाचार्य और ग्राम प्रधान के बीच चल रही खींचतान के कारण भोजन नहीं मिल पा रहा। प्रधानाचार्या अर्चना राठी ने बताया कि प्रधान मिड-डे मील के लिए फर्जी तरीके से बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव दे रहे हैं। इस कारण कनवर्जन कॉस्ट नहीं मिली है। 

प्रधान जीत सिंह का कहना है कि प्रधानाचार्या द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। प्रधानाचार्य के खिलाफ गांव के लोगों ने आला अधिकारियों से बच्चों का मानसिक उत्पीड़न करने की शिकायत की हुई है। प्रधानाचार्य का हस्तिनापुर के लिए स्थानांतरण कर दिया गया था। लेकिन वे कोर्ट से स्टे ले आईं।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कभी-कभी आता है अच्छा खाना

नगर क्षेत्र स्थित खैरनगर प्राथमिक कन्या विद्यालय में 80 बालिकाएं पढ़ती हैं। शनिवार को स्कूल में मेन्यू के आधार पर चावल सब्जी दी गई। प्रधानाचार्या स्वालेहा कयूम ने बताया कि खाना तो प्रतिदिन आता है, कभी अच्छा तो कभी कामचलाऊ  होता है। दूध में पानी अधिक होता है। हमने खाद्य विभाग में भी इसकी शिकायत की है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
तीन माह से नहीं मिला भोजन
रजपुरा ब्लॉक के गांव पचपेड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चे तीन माह से मिड-डे मील का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक खाना नहीं मिला। प्रधानाचार्या सुदेश बाला ने बताया कि बजट न मिलने के कारण बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा है। बीएसए और एबीएसए को सूचना दी जा चुकी है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रधान के साथ बनाई व्यवस्था 
खरखौदा ब्लॉक के गांव कैली स्थित प्राथमिक विद्यालय में 52 बच्चे पढ़ते हैं। यहां पर मेन्यू के आधार पर भोजन बंटता पाया गया। कार्यवाहक इंचार्ज नीरज त्यागी ने बताया कि भोजन स्कूल में ही तैयार कराया जाता है। ग्राम प्रधान के साथ मिलकर व्यवस्था की गई है। शनिवार को मेन्यू के अनुसार चावल और सब्जी बच्चों को दिए गए।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दस बजे पहुंच गया भोजन 
खरखौदा नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 178 बच्चे पंजीकृत हैं। शनिवार को 116 बच्चे ही उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापक रजनीश शर्मा ने बताया कि स्कूल में एनजीओ मिड-डे मील का वितरण करती है। सुबह दस बजे तक ही मिड-डे मील विद्यालय में पहुंच जाता है। खाने की क्वालिटी कभी-कभी अच्छी नहीं होती।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दौराला में ठीक मिला भोजन 
दौराला कस्बा स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर दो में 66 बच्चे पढ़ते हैं। शनिवार को दोपहर 12 से पहले ही मिड-डे मील बांटा जा चुका था। प्रधानाचार्या मारुती अग्रवाल और बच्चों से बात की गयी तो उन्होंने खाने की गुणवत्ता अच्छी बताई। स्कूल में एनजीओ द्वारा खाना दिया जा रहा है।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रसोइया ही नहीं मिला
माछरा ब्लॉक के रेहदरा स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में चालू शिक्षण में बच्चों को एक दिन भी दोपहर का खाना नहीं मिला है। बताया गया है कि यहां पर खाना बनाने के लिए रसोइया तैनात नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान दुष्यंत त्यागी का कहना है कि कई बार बीएसए और डीएम से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी सुनते ही नहीं हैं।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन से नहीं मिला पैसा 
पनवाड़ी स्थित प्राथमिक पाठशाला के बच्चों को पिछले दो माह से मिड-डे मील नहीं मिला है। कार्यवाहक इंचार्ज सवित्री देवी ने बताया कि स्कूल में 83 बच्चे हैं। पिछले दो माह से मिड-डे मील के लिए विभाग से धन नहीं मिला है। जिसके कारण स्कूल में खाना नहीं बना। स्कूल के इंचार्ज विक्रम सिंह ने अपने जेब से धन खर्च करके बच्चों के लिए खाना बनवाया। इन्होंने बताया कि मिड-डे मील बंद होने की सूचना विभाग के अधिकारियों को समय से दी जा चुकी है।
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सुधारेंगे व्यवस्था
मिड-डे मील के लिए सरकार से बजट नहीं मिला था। अब पैसा आ गया है। किसी स्कूल में दिक्कत हो सकती है। लेकिन सभी  शिक्षकों को निर्देश दिए हुए हैं कि वह व्यवस्था बनाएं। कुछ स्कूलों में रसोइया की दिक्कत है। एक हजार रुपये में कोई खाना बनाने वाला नहीं मिल रहा है। -सतेंद्र ढाका, बीएसए

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