‘जीना ही जिंदगी समझा और फसाना बन गया कोई, अपनी हस्ती मिटाकर ए-अंजुम, अपनी हस्ती बन गया कोई।’ सुलक्षणा ‘अंजुम’ की ये पंक्तियां किसान मसीहा, स्वाधीनता सेनानी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। 23 दिसंबर 1902 को किसान परिवार में जन्मे चौधरी साहब इस तरह आकाश के नक्षत्र में दमकेंगे ये शायद किसी को पता नहीं था। ये चौधरी साहब के कर्म व भाग्य की विशेषता थी कि वे एक साधारण किसान रहने के स्थान पर देश के किसानों की आवाज बने।