बुरी नीयत वालों के कारण बेटियों की मौत होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कहीं बेटियों की हत्या की जा रही है, तो कहीं परेशान होकर वे खुद ही जान दे रही हैं। किराएदार की छेड़छाड़ से परेशान छात्रा की मौत ने एक बार फिर ये सोचने को मजबूर कर दिया है कि आखिर ये सिलसिला कब थमेगा। ऐसा कौन सा कानून बनाया जाए, जिससे बेवजह बेटियों की जान न जाए। छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने लिए एंटी स्क्वायड टीमें काम कर रही हैं, लेकिन लगातार बेटियां परेशान हो रही हैं। कई बेटियों ने दुनिया छोड़ दी, तो कई ने पढ़ाई। स्कूल-ट्यूशन जाती छात्राओं से भी छेड़छाड़ जिले में आम हो गई है। स्कूल संचालक और अभिभावक कई बार मनचलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।