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माता कात्यायनी देवी मंदिर: यहां दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु, होती है हर मनोकामना पूरी

Sat, 01 Jun 2019 05:46 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में परीक्षितगढ़ क्षेत्र आराधना, देवी भक्ति और आस्था का बड़ा केंद्र है। माता कात्यायनी देवी मंदिर यहां आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर के बारे में प्रचलित है कि मातारानी ने स्वयं राजा नैन सिंह को सपने में आकर मंदिर का निर्माण कराने की बात कही थी। उसी स्वप्न के आधार पर राजा ने क्षेत्र में खुदाई कराई, तो यहां माता रानी की मूर्ति निकली थी। अगली स्लाइडों तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट:-
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
सदियों से यह मंदिर लोगों की मनोकामना पूर्ति का स्थल बन गया। दूर-दूर से लोग यहां पर दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि माता सभी की मनोकामना पूरी करती हैं।
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
प्रचलित है कि एक बार परीक्षितगढ़ के अंतिम राजा नैन सिंह के राज्य को चारों ओर से शत्रुओं की सेना ने घेर लिया। राज्य को सेना से घिरा देखा राजा चिंताग्रस्त हो रहे थे, सोचते सोचते कब नींद आई पता नहीं चला।

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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
सपने में माता ने बताया कि राजा तेरे राज्य की मैं स्वयं रक्षा करूंगी। मैं तेरे महल की पूर्व दिशा में मौजूद हूं। तू खुदाई कराकर मुझे बाहर निकालने का संकल्प ले। अगले ही दिन राजा नैन सिंह ने सपने के बारे में अपने राज ज्योतिष पंडित शादी शर्मा को बताया।
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने उक्त स्थान पर खुदाई करने का संकल्प लेने का मशवरा देते हुए खुदाई का काम शुरू कराया। खुदाई से जो देवी प्रतिमा निकली उसे देखकर पंडित ने बताया कि ये माता कात्यायनी हैं जो ब्रजमंडल और राधा जी की अधिस्ठात्री देवी हैं। भगवान श्री कृष्ण ने यहां देवी का आह्वान कर पूजन किया था, तभी से मातारानी इस राज्य की रक्षा करती हैं।
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
आज भी मौजूद हैं शिलाएं और प्राचीन मूर्तियां
आज भी मंदिर में खुदाई से प्राप्त शिलाएं व प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं। किला परीक्षितगढ़ राजा नैनसिंह ने का राज्य था इसकी राजधानी उन्होंने बहसूमा को बनाया था। उन्होंने परीक्षितगढ़ का पुन: निर्माण कराया था। राजा नैनसिंह का जन्म 21 नवंबर 1746 को बहसूमा में हुआ था। बचपन से चतुर स्वभाव के थे।
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माता कात्यायनी देवी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बताते हैं कि इस मंदिर में राजा नैनसिंह के शासनकाल के संस्कृत भाषा की जननी प्राकृत भाषा का शिलालेख आज भी विद्यमान हैं। जिस पर लिखा है कि राजा नैनसिंह अपने राज्य को रुहेलखंड तक बढ़ाकर लेते गए। पंडित ने कहा कि आप माता का मंदिर निर्माण कराने का संकल्प लो, तो सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। राजा ने भी विधिविधान से मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। तभी सूचना मिली कि विरोधी सेना ने जो क्षेत्र को चारों तरफ से घेरकर हमला करने की तैयारी में थी, वो स्वयं अचानक भाग गई। सेना के जाने की सूचना मिलते ही राजा की माता में आस्था बढ़ गई। खुदाई में प्राचीन मंदिर के अवशेष, शिलाएं, अन्य प्रतिमाओं सहित अन्य वस्तुएं भी मिलीं। राज्य में संवत् 1858 में मंदिर निर्माण पूरा कराया।

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