सुबह करीब पौने नौ बजे का वक्त। हॉटस्पॉट क्षेत्र तैमूरशाह मोहल्ले की गली के बाहर एक सब्जी का ठेला खड़ा है। अंदर गली में मोहल्ले वाले प्रशासन द्वारा गली के जिम्मेदार बनाए गए लोगों के जरिए सब्जी मंगा रहे थे। जिम्मेदार एक- एक कर आते और सब्जी वाले को नगद देकर सब्जी ले जाते। इसी बीच एक जिम्मेदार ने सब्जी वाले को आवाज लगाकर कहा बडे़ मियां, एक-दो लोग हैं जो कहते हैं पैसे नहीं हैं, बताओ क्या करें। चलो आप सब्जी दे दो, पैसे मैं दे दूंगा, सब्जी वाले बड़े मियां भी बड़े रहमदिल निकले। बोले अरे भाई जान खुदा की रहमत है, दो वक्त की रोटी हमें मजे से मिलती है। दो लोगों से पैसे नहीं लिए तो क्या हुआ, अल्लाह ताल्हा और देगा। नाज है कि मैं भी किसी के काम सकता हूं।