लाॅकडाउन के बीच किसानों पर दोहरी मार पड़ी है पहले बारिश के दौरान गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ तो अब फल और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों की फसल लाॅकडाउन के कारण बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। गंगा किनारे खरबूजा, तरबूज आदि की खेती करने वाले किसानों की सैकडों क्विंटल फसल खेत में ही सड़ रही है। आगे जानें कैसे किसानों को फसल की लागत तो दूर ट्रांसपोर्ट का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है :-
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बर्बाद हुई खरबूजे की फसल
- फोटो : amar ujala
मेरठ से सटे हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में गंगा किनारे खरबूजा और तरबूज, खीरा, ककड़ी आदि की खेती बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा की जाती है। हर साल गर्मी के मौसम में जहां इन फसलों से किसानों को अच्छी आमदनी हो जाती थी। वहीं इस बार कोरोना महामारी के कारण लाॅकडाउन लगने से किसान फसल को मंडी अथवा बाजार तक नहीं ले जा पा रहे हैं। नतीजन फसल खेत में ही बर्बाद हो रही है।
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बर्बाद हुई खरबूजे की फसल
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क्षेत्रीय किसान राजकुमार, हरि सिंह, प्रदीप, कृष्णपाल आदि का कहना है कि इस बार ईश्वर ने ऐसी तबाही मचाई है जिसके चलते किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। एक तरफ कोरोना से जान बचानी भारी हो रही है। वहीं दूसरी ओर खेत से बड़ा खर्च कर उगाई गई सब्जियों की लागत पूरी करना भारी हो रहा है।
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बर्बाद हुई खरबूजे की फसल
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खरबूजा तरबूज को तुड़वा कर जब मंडी तक पहुंचते हैं तो मंडी में मंदी की मार के कारण ओने-पौने दामों में ही खरबूजा और तरबूज को बेचना पड़ रहा है जिससे उनकी लागत तो दूर, ट्रांसपोर्ट का भी पैसा वापस नहीं हो रहा है। जिसके कारण किसानों का मंडियों से मोहभंग हो रहा है।
फतेहपुर प्रेम स्थित गंगा किनारे के खेतों में खरबूजा की फसल खेतों में ही पड़ी सड़ रही है। किसानों का कहना है कि लॉकडाउन ने इस बार गंगा किनारे उगने वाली प्लेज की खेती को प्रभावित किया है।