सुनीता की फाइल फोटो और हत्यारोपी पारस सोम।
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उम्र को लेकर बचाव पक्ष का दांव और अदालती प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेजा गया था, लेकिन कुछ समय बाद परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए कोर्ट में अर्जी दी, जिसके बाद मामला किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) भेज दिया गया। उम्र को लेकर बचाव पक्ष ने इसे साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।
बचाव पक्ष ने आदर्श जनता इंटर कॉलेज, कपसाड़ से जुड़ी हाई स्कूल की मार्कशीट पेश की, जिसमें जन्मतिथि 11 मई 2008 दर्ज थी। कोर्ट ने स्कूल के प्रधानाचार्य को तलब किया और स्कूल के एडमिशन रजिस्टर का मिलान किया। 4 फरवरी को कक्षा 5 का सर्टिफिकेट और 7 फरवरी को कोर्ट ने कक्षा 1 से 4 तक के शैक्षणिक रिकॉर्ड भी तलब किए थे। बचाव पक्ष का तर्क था कि सभी कक्षाओं के रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक समान है।