कांधे पर 90 किलो गंगाजल की कांवड़। बोल बम, बोल बम के जयकारे लगाते हुए कृष बढ़ते जा रहे हैं। हरिद्वार से कांवड़ उठाकर चार दिन से पैदल चल रहे कृष के पैरों में छाले भी उनके कदमाें को रोक नहीं पा रहे हैं। कृष से बात करने पर उन्होंने बताया कि उनकी माता बीमार हैं, वे गंगा स्नान करना चाहती हैं, ऐसे में वह माता-पिता दोनों को गंगाजल से स्नान कराने के लिए कांवड़ ला रहे हैं।