फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलवामा आतंकी हमले में शामली के दो लाल शहीद, रो-रोकर परिजनों का बुरा हाल, देखें तस्वीरें

Sun, 30 Aug 2020 12:05 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
विज्ञापन
1 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
जम्मू- कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को हुए आतंकी हमले में शामली के दो लाल शहीद हो गए। दोनों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं दोनों गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है। दोनों के घर के बहार ग्रामीणों का तांता लगा हुआ है। आगे देखिए कुछ तस्वीरें:- 
विज्ञापन

2 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि पुलवामा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में प्रदीप और अमित शहीद हो गए है। प्रदीप दो दिन पहले ही तयेरे भाई की शादी के बाद लौटा था। जबकि अमित 20 दिन पहले ही वापस लौटा था। प्रदीम ने गुरुवार सुबह 11 बजे भी परिजनों से प्रदीप की फोन पर बात हुई थी, लेकिन शाम को ही उसकी शहादत की खबर आ गई। प्रदीप के पिता जगदीश का कहना है कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है, लेकिन वह चाहते हैं कि मोदी सरकार उसकी शहादत का ऐसा बदला ले।
विज्ञापन

3 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
परिजनों के अनुसार प्रदीप वर्ष 2003 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। वर्तमान में उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। उसकी पत्नी कामिनी और दो बेटे सिद्धार्थ और दुष्यंत गाजियाबाद में रहते हैं। बाकी परिजन गांव में। परिजनों ने बताया कि आठ फरवरी को ही वो अपने ताऊ के लड़के अमित की शादी में छुट्टी लेकर आया था। गाजियाबाद के गोविंदपुरम निवासी उसकी पत्नी और बच्चे भी आए थे। सब बड़े खुश थे। 12 फरवरी को ही वो वापस ड्यूटी पर गया था। चचेरे भाई उमेश कुमार के अनुसार  के अनुसार गुरुवार सुबह 11 बजे ही प्रदीप का फोन उनके पास आया था।

4 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
उसने कहा था कि वो अपनी ड्यूटी पर पहुंच गया है। परिजन भी निश्चिंत हो गए थे, लेकिन शाम को वहां आतंकी हमले की खबर मीडिया पर चलने के बाद वे परेशान हो गए। प्रदीप का फोन मिलाया, लेकिन वो नहीं लगा। वे लोग प्रदीप के परिचितों से संपर्क में लगे थे। इस बीच रात करीब सवा नौ बजे उसकी बटालियन के किसी अधिकारी का फोन आया कि प्रदीप कुमार आतंकी हमले में शहीद हो गए हैं। ये सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि ये भी हो सकता है।
विज्ञापन

5 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
खबर आते ही प्रदीप के घर उमड़ा पूरा गांव 
प्रदीप की शहादत की खबर आते ही प्रदीप के घर ग्रामीणों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। ग्रामीण परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे थे। प्रदीप की पत्नी और बच्चे गाजियाबाद में ही थे। उन्हें भी परिजनों ने देर रात तक खबर नहीं दी थी। रात करीब 11 बजे सैकड़ों ग्रामीण प्रदीप के घर पर जुटे थे। आदर्श मंडी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और परिजनों से बात की।
विज्ञापन

6 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
परिजनों पर टूट पड़ा गमों का पहाड़
परिजनों के अनुसार प्रदीप के परिवार में उसके पिता जगदीश और मां हैं। जो बनत में रहते हैं। पिता खेती बाड़ी करते हैं। प्रदीप अपने भाइयों में सबसे बड़ा था। उसका बीच का भाई अमित भी आर्मी से रिटायर हो चुका है। सबसे छोटा भाई नवीन शामली में एक निजी चिकित्सक के यहां काम करता है। एक बहन आरजू हैं, जिसकी शादी हो चुकी है। इस घटना को सुनकर परिवार में गमों का पहाड़ टूट पड़ा था। उसकी पत्नी और बच्चे गाजियाबाद में ही थे।
नाम -   कां. प्रदीप कुमार
पिता-     जगदीश प्रसाद 
उम्र -       37
पता       गांव बनत, जिला शामली
बटालियन -21वीं बटालियन सीआरपीएफ
विज्ञापन

7 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पत्नी बेटों को सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सके
परिजनों के अनुसार प्रदीप अपने दो बेटों को बहुत प्यार करता था। वह अक्सर उनसे फोन पर बात करता था। बड़ा बेटा सिद्धार्थ कक्षा 12 और छोटा बेटा दुष्यंत कक्षा नौ में पढ़ता है। दोनों गाजियाबाद में रहते और पढ़ते हैं। परिजनों के अनुसार वे लोग उसकी शहादत की खबर गाजियाबाद में उसकी पत्नी और बच्चे को देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे थे।

8 of 13
प्रदीप का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आज रात तक शव आने की उम्मीद
शामली। प्रदीप का शव शुक्रवार रात या शनिवार तड़के तक ही आने की संभावना है। बताया जाता है कि शव के पोस्टमार्टम और तमाम प्रक्रिया के बाद जवान उसके शव को लेकर यहां आएंगे।  पूरे सैनिक सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार होगा। हालांकि इस संबंध में देर रात तक कोई भी अधिकारिक आदेश जिला पुलिस को नहीं मिले थे।

9 of 13
प्रदीप का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बहुत मिलनसार था प्रदीप
बनत के ग्रामीणों ने बताया कि प्रदीप काफी मिलनसार था। उसका परिवार भले ही गाजियाबाद रहता हो, लेकिन जब भी वो छुट्टी आता था गांव में जरूर आता था। बच्चों के साथ यहां आता था। गांव में अपने दोस्तों और आसपड़ोस वालों से मिलता था। उन्हें कश्मीर और सेना के किस्से सुनाता था। वो काफी मिलनसार था। हसमुख स्वभाव और मिलनसार होने का ही नतीजा था कि उसकी शहादत की खबर आते ही उसके गांव के दोस्त और सैकड़ों ग्रामीण वहां जुट गए थे।

10 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
मेरा बेटा बहादुर था
प्रदीप के पिता जगदीश का कहना है कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। लेकिन वह चाहते हैं कि सरकार उसकी शाहदत का ऐसा बदला ले कि आतंकियों और पाकिस्तान की सात पुश्तें याद रखें। प्रदीप की शहादत की खबर मिलते ही परिवार में गमों का पहाड़ टूट गया था। परिवार में कोहराम था। पिता जगदीश और मां सुरेंता की आंखों में आंसू थे। पिता जगदीश ने कहा कि उनका बेटा बहादुर था।

11 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
वो जब भी आता बताया करता कि किस तरह हमारी सेना आतंकियों के छक्के छुड़ाती है। उन्हें बेटे के खोने का गम तो है, लेकिन तसल्ली इस बात है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। बस वे सरकार से यही चाहते हैं कि उसके बेटे की शहादत का ऐसा बदला ले कि आतंकियों और उनके शरणदाता पाकिस्तान की सात नस्लें भी याद रखें, तभी इस हमले के शहीद जवानों की चिता ठंडी होगी।

12 of 13
अमित का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आंतकी हमले में अमित कुमार पुत्र सोहनलाल निवासी शामली जनपद के शहीद होने की पुष्टि हो गई है। शुक्रवार सुबह करीब 6:15 बजे परिजनों के पास सीआरपीएफ से फोन गया है। बताया गया कि अमित का परिवार शामली शहर के रेल पार रहता है। वह 2017 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। 12 फरवरी को ही 20 दिन की छुट्टी के बाद वापस गया था। परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। करीब 21 वर्षीय अमित अविवाहित है। इस घटना में शहीद हुए जवानों में 12 जवान यूपी से हैं।
विज्ञापन

13 of 13
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
सरकारी तौर पर अभी तक पुलवामा में शहीद शामली जनपद के किसी भी जवान के बारे में कोई लिखित सूचना नहीं मिली है। बनत के प्रदीप नाम के जवान के परिजन ही उसकी शहादत की पुष्टि कर रहे हैं। - अजय कुमार एसपी शामली

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें