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इंस्पेक्टर ने जान देकर बचाया बुलंदशहर, भीड़ ने की थी सीओ को जिंदा जलाने की कोशिश  

Tue, 04 Dec 2018 10:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना कांड से बड़ा मामला बुलंदशहर में हो सकता था। गोकशी को लेकर बुलंदशहर जलाने की कोशिश थी। कुछ लोगों के नापाक मंसूबे अधूरे रह गए। इंस्पेक्टर की जान गंवाकर पुलिस विभाग ने बुलंदशहर को जलने से बचा लिया है। पुलिस का दावा कि बुलंदशहर में इज्तिमा में सोमवार को करीब 18 से 20 लाख लोग मौजूद थे। गोकशी को लेकर बुलंदशहर में बवाल हुआ। इसकी जानकारी लगते ही एडीजी ने अलर्ट जारी किया। इस पर मेरठ जोन की पुलिस तुरंत एक्टिव हो गई। अफवाहों का दौर बहुत ज्यादा था। ऐसे हालत में पुलिस ने रात तक इज्तिमा में लौटने वाले लोगों को सकुशल उनके घर तक पहुंचाया।
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एडीएम और एसपी पहुंचे मोदीपुरम चेकपोस्ट 
बुलंदशहर के स्याना में हुई घटना के फ्लैश होते ही पुलिस प्रशासनिक अधिकारी सड़क पर उतर आए। सोमवार को इज्तिमा के समापन के बाद लोग घर लौट रहे थे। ऐसे में बड़ी संख्या मेें भीड़ हाईवे पर उमड़ रही थी। यहां ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए एडीएम सिटी मुकेश चंद व एसपी सिटी रणविजय सिंह फोर्स के साथ मोदीपुरम चेकपोस्ट पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने पुलिस को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
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सीओ को जिंदा जलाने की कोशिश
सीओ स्याना सत्यप्रकाश शर्मा साल 2016-2017 में पुलिस लाइन मेरठ के प्रतिसार निरीक्षक रहे हैं। प्रमोशन पाकर सीओ बने बुलंदशहर के स्याना सर्किल में तैनात हैं। सोमवार को बवाल के बाद भीड़ ने सीओ से भी हाथापाई की। चौकी में तोड़फोड़ की। चिंगरावठी पुलिस चौकी में सीओ को बंद करके आगजनी कर दी गई। सिपाहियों और सीओ ने किसी तरह विंडो के रास्ते कूदकर जान बचाई। बवाल के बाद मेरठ से भारी संख्या में फोर्स, पीएसी और आरएएफ को बुलंदशहर भेजा गया। गढ़-बुलंदशहर हाईवे को भी पुलिस ने बवाल के बाद खाली करा दिया था। जिसके बाद वाहनों को स्याना और औरंगाबाद से डायवर्ट कर दिया था।

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सुमित कुमार फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अफवाहों को लेकर चलती रहीं चर्चाएं
बुलंदशहर में इंस्पेक्टर और 19 वर्षीय युवक सुमित की मौत के बाद अफवाह फैल गई कि गोकशी के बाद सांप्रदायिक तनाव हो गया। ऐसे समय में बुलंदशहर में तब्लीगी इज्तिमा में लाखों लोगों की भीड़ थी और सोमवार को तीसरा और आखिरी दिन था। सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो वायरल होने से अधिकारियों के होश उड़े रहे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कई पुरानी वीडियो भी वायरल की गई हैं। शरारती तत्वों पर पुलिस नजर रखे हुए है। 
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पल-पल की जानकारी लेते रहे डीजीपी, फोर्स भेजी
बुलंदशहर में बवाल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वहां हिंदू संगठन के लोग भी जमा हो गए। इसको लेकर लखनऊ तक खलबली मच गई। क्योंकि बुलंदशहर में मुस्लिम समुदाय के लाखों लोग तब्लीगी इज्तिमा में मौजूद थे। ये घटना सांप्रदायिक तूल पकड़ सकती थी। दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने आ सकते थे। इसे लेकर डीजीपी ओपी सिंह अलर्ट थे। उनकी नजर इज्तिमा के मूवमेंट पर थी। वह पल पल की जानकारी लेते और दूसरे जनपद की फोर्स भी भेजते रहे। तब्लीगी इज्तिमा में लाखों की भीड़ बुलंदशहर में थी और उसी जनपद में गोकशी को लेकर बवाल हो गया। बेकाबू भीड़ इज्तिमा से लौटते लोगों पर हमला करेगी या फिर इज्तिमा में शामिल होने वाले लोग उत्तेजित होकर बवाल बढ़ा सकते हैं। इसको लेकर पुलिस की बेचैनी ज्यादा थी। 
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communal tension in bulandshahr - फोटो : अमर उजाला
डीजीपी ओपी सिंह ने एडीजी मेरठ जोन, आईजी रेंज, बुलंदशहर एसएसपी और बुलंदशहर के आसपास के जिले मेरठ, हापुड़ और गाजियाबाद के कप्तानों से फोन पर बातचीत की। उनको तुरंत बॉर्डर पर तैनात होने को कहा। बोले, इज्तिमा में शामिल लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाओ। भीड़ के मूवमेंट पर नजर रखो। बैरियर लगाओ या फोर्स, दोनों पक्ष आमने सामने नहीं आने चाहिए। इसके बाद मेरठ जोन की पुलिस एक्टिव हो गई। एडीजी ने बताया कि इंस्पेक्टर की मौत से पुलिस विभाग को सदमा लगा है, लेकिन पुलिस ने लाखों लोगों की जान बचाई है। बवाल को नियंत्रित किया और स्थिति सामान्य की। पुलिस दावा करती कि अगर बवाल बढ़ जाता तो यह मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना से भी बड़ा हो जाता। समय रहते इस पर काबू किया गया। 
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प्रदर्शनकारियों ने वाहन को लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
देरी से पहुंचे अफसर, डीजीपी हुए नाराज 
बुलंदशहर में बवाल की सूचना के बावजूद कई पुलिस अधिकारी गंभीर नहीं हुए। बस फोन पर बुलंदशहर के हालात जानते रहे। लखनऊ से फोन आते रहे और अधिकारी उनको अधूरी बात बताते रहे। इंस्पेक्टर को भीड़ ने मार डाला, यह सुनने के बाद अधिकारियों की नींद टूटी। उसके बाद कई अधिकारियों ने घटनास्थल पर जाने का जोखिम उठाया। डीजीपी ने अधिकारियों की लोकेशन भी पूछी। अधिकारी देरी से पहुंचे, इसको लेकर डीजीपी नाराज हैं। 
 

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आग में जले वाहन - फोटो : अमर उजाला
लेते रहे अपडेट
बुलंदशहर बवाल की पल पल की जानकारी डीजीपी कंट्रोल रूम से लेते रहे। किस-किस रूट से इज्तिमा में शामिल लोग बुलंदशहर से वापस लौट रहे है। बवाल करने वालों की भीड़ का मूवमेंट कहां है। उनको कैसे रोका जाएगा, इसकी प्लानिंग डीजीपी खुद ही पुलिस अधिकारियों को वायरलेस सेट के जरिये बताते रहे। सूत्रों के मुताबिक डीजीपी ने बुलंदशहर और मेरठ के कई स्थानीय लोगों से माहौल की स्थिति जानी। उसके बाद ही कंट्रोल रूम को निर्देश दिए कि फोर्स को कहां कहां पर अलर्ट ज्यादा करना है। वहीं डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि भीड़ को लाठी फटकारकर खदेड़ दो। इज्तिमा से लौट रहे लोगों का रूट बदल दो। ऐसे किसी रूट पर लोगों को न भेजें, जहां से वह आसानी से स्याना जा सकें।  

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दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा - फोटो : अमर उजाला
चौकी पर बचे तो खेत में घेर लिया   
बुलंदशहर के स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत की वीडियो वायरल हुई तो पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अफसर पल- पल की जानकारी लेते रहे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सड़क पर उतर आए। इंस्पेक्टर सुबोध मेरठ और मुजफ्फरनगर भी तैनात रहे थे। 

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दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा - फोटो : अमर उजाला
एटा के जैतरा थाना क्षेत्र के तरगवा गांव निवासी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार बुलंदशहर के स्याना थाने में प्रभारी निरीक्षक थे। सोमवार को गढ़-बुलंदशहर स्टेट हाईवे पर चिंगरावठी चौकी पर गोकशी को लेकर भीड़ ने बवाल कर दिया। पुलिस चौकी पर पथराव और आगजनी की सूचना पर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सरकारी सूमो गाड़ी से पुलिस चौकी से चले थे। पुलिस चौकी पर भीड़ बवाल कर रही थी। जिसके बाद भीड़ ने इंस्पेक्टर की गाड़ी को घेर लिया। पुलिस ने बलवाइयों से बचाव के लिए गाड़ी को हाईवे से खेत में उतार दिया। लेकिन भीड़ पीछा करते हुए फायरिंग करती रही। 
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गाड़ी में लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
अफवाहों पर न दें ध्यान: शहर काजी  
बुलंदशहर के स्याना में हुई घटना पर शहर काजी जैनुस साजिद्दीन ने अफसोस जताते हुए सभी वर्गों से संयम बरतने की अपील की है। कहा है कि स्याना की घटना का आसपास के शहरों या इलाकों में प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। हर नागरिक का दायित्व बनता है कि वह अपने शहर या गांव में अमनचैन कायम रखें। 

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