डॉ.अतुल व मेरठ पुलिस
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वह समझ गईं कि यही वह लड़की है। मैंने उसका हाथ पकड़ा और साथ चलने को कहा, वह थोड़ा डर रही थी। तभी फिर कोठा चलाने वाली मुझे रोकने लगी लेकिन मैंने कहा कि ये लड़की यहां से जाना चाहती है। अगर ये सीढ़ियां उतरती है तो हमारी हुई और अगर नहीं, तो फिर मैं चली जाऊंगी। मैंने इतना ही कहा था कि वो भागती हुई सीढ़ियों से उतरी और गाड़ी में बैठ गई।
इसके बाद अतुल शर्मा ने मनीष के माता-पिता से बात की। स्वाभाविक था कि पहले वो लोग तैयार नहीं हुए लेकिन बेटे की ज़िद के आगे और समझाने पर मान गए। लेकिन, उन्होंने लड़की का अतीत छुपाए रखने की शर्त रखी। अनीता बताती हैं, मैंने तो शादी के बारे में सोचना ही छोड़ दिया था लेकिन मनीष के आने से थोड़ी उम्मीद जगी थी। मनीष के माता पिता ने धीरे-धीरे मुझे पूरी तरह अपना लिया। आज मेरी एक बेटी भी है और उसे एक सम्मानजनक जिंदगी नसीब है।