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UP: विदेशी परिंदों के कलरव से गुंजायमान हुई हस्तिनापुर सेंचुरी, झीलों में कर रहे अठखेलियां, लुभा रही चहचहाहट

Tue, 09 Jan 2024 01:21 PM IST
Dimple Sirohi रविंद्र चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, हस्तिनापुर/मेरठ
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
कहां अपने परों को फड़फड़ाकर शोर करना है, परिंदा सब जानता है, कहां से उड़ान भरनी है, कौन सी जमीन पर उतरना है। परिंदों के लिए सबसे मुफीद ये जमीन इन दिनों हस्तिनापुर ही है। यहां की आब-ओ-हवा इन विदेशी गगनचरों को इतनी रास आती है कि सर्दी आते ही ये हजारों मील की परवाज भरकर यहां उड़े चले आते हैं।

इन रंग-बिरंगे परिंदों का यह सिलसिला इस बार भी बदस्तूर जारी है। रोमांचित करने वाली बात यह है कि गुजरे वर्ष की तुलना में इस बार तीन गुणा अधिक परिंदों का कुनबा यहां हाजिर हो चुका है। सरहदों से बैर रखने की इंसानी फितरत को नसीहत देते हुए ये विदेशी मेहमान हमारे भारतीय पक्षियों से बखूबी घुलमिल गए हैं। इनकी अठखेलियों और कलरव ने पर्यटकों को कड़कड़ाती और गुलाबी सर्दी में गर्माहट का अहसास करा दिया है।
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
सर्दी की आहट होते ही कई देशों से हिमालय को पार कर हस्तिनापुर की सेंचुरी में हजारों की संख्या में सैंकड़ों प्रजाति के प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या पेन्टेड स्टॉर्क पक्षियों की संख्या नजर आ रही है। बीते वर्ष में यहां 30 प्रजातियां के आने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन इस बार 100 से अधिक प्रजाति यहां पहुंच चुकी हैं।
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
इस बार साइबेरिया, चीन, जापान, कंबोडिया, मंगोलिया, रूस और यूरोपीय देशों से हजारों मील की दूरी तय कर नाइट हेरॉन, पॉन्ड हेरॉन, पेन्टेड स्टॉर्क, ब्लैक हेडेडलबिस ओपेन बिल स्टार्क, लिटिल कॉरमोनेंट, कॉमन ग्रेहार्नबिल आदि पक्षी पहुंचे हैं। इनके लिए सेंचुरी में मौजूद वेटलैंड में भरपूर भोजन है।

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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
ये पक्षी हस्तिनापुर सेंचुरी में करीब तीन माह प्रवास करने के बाद अपने देश लौट जाएंगे। प्रवासी पक्षी जिन देशों से आते हैं, वहां ठंड अधिक होती है। ऐसे में यहां का मौसम उनके भोजन और प्रजनन के लिए मुफीद होता है। इसी वजह से हर साल नवंबर और दिसंबर में इनका आना शुरू हो जाता है। इनमें साइबेरियन पक्षियों की संख्या ज्यादा होती है।
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
पर्यटकों को लुभा रहा पेन्टेड स्टॉर्क पक्षियों का झुंड
पेन्टेड स्टॉर्क पक्षियों का झुंड अंधेरे में सक्रिय होता है। इसके सुनहरे गुलाबी पंख और पीली चोंच के साथ लाल पंजे वेटलैंड में आने वाले पयर्टकों को लुभा रहे हैं।

वहीं सिलेटी और काले रंग का नाइट हेरॉन पक्षी बला का खूबसूरत होता है। यह मछली और कीड़े खाता है। इसकी आंखें लाल व पंजे पीले रंग के होते हैं। नर व मादा एक जैसे दिखते हैं, लेकिन नर पक्षी आकार में बड़ा होता है।
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
हर साल नवंबर और दिसंबर में आते हैं पक्षी
साइबेरिया, कंबोडिया, मंगोलिया, चीन और यूरोपीय देशों से पहुंचे पेंटेड स्टॉर्क झील किनारे खुशनुमा माहौल का लुत्फ ले रहे हैं। ये नवंबर में ही आ जाते हैं और बच्चों को जन्म देते हैं।

पेन्टेड स्टॉर्क शांत स्वभाव और एक ही मुद्रा में घंटों खड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। इनके शरीर पर पेट जैसी सुंदर आकृति होती है, इस वजह से इन्हें पेन्टेड स्टॉर्क कहा आता है।
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Migratory birds, प्रवासी पक्षी - फोटो : Amar Ujala
ग्रे हेरान का शिकार करने का अंदाज निराला
ग्रे हेरान पक्षी के शिकार करने का अंदाज निराला होता है। यह पानी के अंदर जाकर मछली को बाहर लाता है। फिर उसे घायल कर खाता है। यह पक्षी यूरोप, अफ्रीका का मूल निवासी है। सर्दी शुरू होते ही यहां आते हैं। फरवरी में लौट जाते हैं। इन्हें गर्मी जरा भी बर्दाश्त नहीं होती।
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गंगा के तटीय क्षेत्र देखी जा रही स्नेक बर्ड
मूलरूप से साउथ अमेरिका में पाई जाने वाली स्नेक बर्ड भी इस बार हस्तिनापुर के वेटलैंड क्षेत्र में देखी जा रही है। सांप जैसी गर्दन होने की वजह से इस पक्षी को स्नेक बर्ड कहा जाता है। इसके अलावा ओपेन बिल स्टॉर्क, आइविश जैसे पक्षी पहले ही यहां अपना आशियाना बना चुके हैं। ये पक्षी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
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