मेरठ में छात्रा हत्याकांड में कलेक्ट्रेट गेट पर सड़क जाम और बवाल करने पर आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान जाम और हंगामा लगाने वालों पर पुलिस ने लाठियां फटकारी थीं। एसएसपी ने थप्पड़ जड़े थे। वहीं, मामले में पुलिस ने बताया है कि जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया था तब बताया गया था कि वह छात्रा को काफी समय से जानता था।
मेरठ में अनुसूचित जाति की छात्रा की हत्या के मामले में कलक्ट्रेट गेट पर सड़क जाम करने के साथ ही हंगामा और बवाल करने वाले आठ आरोपियों को सिविल लाइन पुलिस ने बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वहीं, 50 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
वीडियो फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान कराने का प्रयास किया जा रहा है। एसएसपी अविनाश पांडेय का कहना है कि माहौल खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सोशल मीडिया पर इस मामले को तूल देने के मामले में साइबर विशेषज्ञ निगरानी कर रहे हैं।
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हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना और जाम लगाते लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी ने खदेड़ा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रोहटा थाना क्षेत्र के एक गांव की बीए छात्रा की हत्या के मामले में बुधवार को कलक्ट्रेट के बाहर जमकर बवाल हुआ था। पीड़ित परिवार के लोगों के साथ ही मेरठ और बाहरी जिलों से आए सैकड़ों समर्थक मुख्य आरोपी अंकुश के भाई पीएसी सिपाही अंकित चौधरी और उसकी मां की गिरफ्तारी, दुष्कर्म की धाराएं जोड़ने व विवेचना में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
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हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना और जाम लगाते लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी ने खदेड़ा
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करीब तीन घंटे तक चले धरने प्रदर्शन के बाद मौके पर पहुंचे एसएसपी अविनाश पांडेय ने धरना खत्म कराने का प्रयास किया मगर ग्रामीण नहीं माने, बाद में पुलिस ने लाठियां फटकार कर जाम खुलवाया। एसएसपी ने बंदी वाहन के अंदर प्रदर्शन में शामिल रहे रवि गौतम को कई थप्पड़ भी मारे थे। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पूरी कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना और जाम लगाते लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी ने खदेड़ा
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इन्हें भेजा गया जेल
इस मामले में रवि गौतम, दिग्विजय भाटी, लवी प्रधान उर्फ शुभम, ऋतिक गौतम, नवनीत कुमार, अरविंद कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ, अंकित कुमार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें चौधरी चरण सिंह जिला कारागार 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वीडियो के माध्यम से पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है।
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दिग्विजय सिंह भाटी, रवि गौतम और हिमांशु हैं मुख्य आरोपी
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि कलक्ट्रेट व कमिश्नरी कार्यालय के बाहर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने और मुख्य मार्ग को जाम करने के मामले में मुख्य आरोपी दिग्विजय सिंह भाटी, रवि गौतम, सुशील गौतम और हिमांशु सिद्धार्थ हैं। दिग्विजय भाटी पर पहले से नौ मुकदमे दर्ज हैं।
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बैंक मैनेजर को बैंक में घुसकर जातिसूचक शब्द बोलकर धमकाने, टोल बूथ पर बैरियर तोड़ने व टोल कर्मचारियों को धमकाने, दुष्कर्म पीड़िता की मां को धमकाने एवं अन्य कई केस दर्ज हैं। दिग्विजय पर एससी-एसटी एक्ट का भी मुकदमा दर्ज है।
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दिग्विजय भाटी 10 दिन पहले अमरोहा से जिला बदर हुआ था। ऋतिक पर भी हत्या के प्रयास और सड़क पर जाम का मुकदमा दर्ज है। यह अमित मरिंडा का साथी है। एसएसपी ने बताया कि नाबालिगों और महिलाओं को भड़का कर जाम लगवाया गया।
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जातिगत बढ़ावा देने वालों पर नजर
पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा प्रकरण को अनावश्यक रूप से जातिगत बढावा देने का काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया लैब से सभी की निगरानी की जा रही है। इसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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वाहन पर पुलिस का स्टीकर लगाकर हुड़दंग का वीडियो हुआ था वायरल
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि अमित मरिंडा का साथी ऋतिक का पुलिस का स्टीकर लगे अपने वाहन से हुड़दंग और स्टंटबाजी का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में पुलिस ने स्टंटबाजी का केस दर्ज किया था।
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वादी ने प्राथमिकी दर्ज होने के सात दिन बाद दिया लिखित बयान
अनुसूचित जाति की छात्रा का शव 17 मई को थाना रोहटा क्षेत्र से बरामद हुआ था। छात्रा के परिजनों ने 16 मई को थाना टीपीनगर में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद उसी रात उन्होंने तहरीर देकर अंकुश चौधरी पर शादी का दबाव बनाने और अपहरण कर ले जाने का आरोप लगाया था। पुलिस के अनुसार छात्रा 15 मई को परीक्षा देने गई थी लेकिन नहीं लौटी।
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हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते व जाम लगाते दलित समाज के लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी
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इसके बाद परिजनों ने अंकुश चौधरी के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस के अनुसार, छात्रा और अंकुश चौधरी निवासी कल्याणपुर दोनों कई साल से परिचित थे। दोनों की बिरादरी अलग-अलग है। पुलिस ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद विवेचक ने वादी से बयान देने को कहा।
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अंकुश ने बताया...छात्रा को कई साल से जानता था
उधर, पुलिस ने बताया है कि जब आरोपी अंकुश को गिरफ्तार किया गया तो उसने बताया कि वह छात्रा को कई साल से जानता था। इसी बीच में छात्रा किसी दूसरे युवक से बात करने लगी, उसे इसका पता चल गया और उसने छात्रा की हत्या कर दी। छात्रा के परिजनों की मांग है कि अंकुश का एक दोस्त है, जिसका नाम हनी शर्मा है।
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अंकुश का भाई अंकित पीएसी में सिपाही है। इन दोनों को भी जेल भेजा जाए। पुलिस का कहना है कि घटना के वक्त हनी शर्मा केदारनाथ की यात्रा पर गया था। उसने अपने सारे फोटोग्राफ सारे टोल टैक्स की वीडियो, फोटोग्राफी सब पुलिस को दी है। ऐसे में उसे आरोपी कैसे बना दिया जाए।
हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते व जाम लगाते दलित समाज के लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी
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अंकुश का भाई अंकित भी घटना के वक्त नहीं था तो उसे भी क्यों आरोपी बनाया जाए। एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि पुलिस इस केस में निप्षक्ष जांच कर रही है। मुख्य आरोपी को जेल भेजा गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।