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ईडी की जांच में खुुलासा: कमिश्नर रहते हुए पूर्व IAS का शारदा ग्रुप से हुआ गठजोड़, BSP सरकार में बोलती थी तूती

Fri, 20 Sep 2024 10:50 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पूर्व आईएएस मोहिंदर सिंह व आदित्य गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के गबन की परत दर परत नई पोल खुल रही हैं। इसके तार नोएडा से होते हुए मेरठ और चंडीगढ़ तक जुड़ रहे हैं।

प्रमोटरों को बिना किसी राशि के निवेश के जमीन आवंटित कर दी गई। इसे लेकर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मोहिंदर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल कमिश्नर रहते हुए हीपूर्व आईएएस मोहिंदर और शारदा ग्रुप के बीच गठजोड़ हुआ था।
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ईडी की टीम मेरठ में - फोटो : अमर उजाला
मोहिंदर सिंह पर साल 2007 से 2011 के बीच बसपा सरकार के कार्यकाल में लखनऊ में 1400 करोड़ के घोटालों और नोएडा में एक निजी ग्रुप को 330 फ्लैट बनवाने में फायदा पहुंचाने का आरोप है।

बीते बुधवार काे मोहिंदर सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की थी। ईडी की कई घंटे तक चली जांच में करोड़ों के हीरे व सोने की ज्वेलरी और भारी मात्रा नकदी बरामद हुई है। ईडी की जांच अभी जारी है।
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शारदा ग्रुप की फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक मोहिंदर सिंह उत्तर प्रदेश की पूर्व बसपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। बसपा सरकार ने नोएडा सहित लखनऊ में करोड़ों की लागत से महापुरुषों के नाम पर स्मारक व पार्कों का निर्माण करवाया। इनके निर्माण में करीब 1400 करोड़ का घोटाला सामने आया था। इन घोेटालों में बसपा के कई मंत्रियों के साथ मोहिंदर सिंह का नाम भी काफी उछला था।

यह भी पढ़ें: ईडी की कार्रवाई से हड़कंप: नोएडा, मेरठ और चंडीगढ़ तक जुड़ रही कड़ी, पूर्व IAS मोहिंदर से ये कनेक्शन

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शारदा ग्रुप की फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला
इस मामले में यूपी विजिलेंस ने मोहिंदर सिंह को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा था। नवंबर 2011 में मोहिंदर सिंह नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी के सीईओ बने थे। इस दौरान शारदा एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट के नाम से आदित्य और आशीष गुप्ता नोएडा में बुलेवार्ड नामक रिहायशी अपार्टमेंट का निर्माण कर रहे थे। इस प्रोजेक्ट में 330 फ्लैट बनाने के लिए निवेशकों से 636 करोड़ रुपये जुटाए गए थे लेकिन कंपनी ने लोगों को फ्लैट देने के बजाय प्रोजेक्ट की सात एकड़ भूमि दूसरे बिल्डर को बेच दी थी।

ईओडब्ल्यू ने कंपनी और निदेशकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे, जिसकी जांच ईडी को सौंपी गई थी। जांच में पता चला कि कंपनी संचालक गुप्ता बंधुओं को मोहिंदर सिंह ने नियमों के विरुद्ध जाकर लाभ पहुंचाया था।
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हाउसिंग सोसाइटी - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में चला गया था। आरोपी पक्ष को आदेश दिए गए थे कि फरवरी 2024 तक 166 करोड़ रुपये नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी में जमा कराए जाएं।

बावजूद इसके कंपनी ने प्रोजेक्ट के नाम पर निवेशकों से रकम जुटाकर अपने दूसरे प्रोजेक्ट में लगा दी थी। इसी मामले में ईडी की जांच टीम ने अब कार्रवाई करते हुए कंपनी के निदेशकों और मोहिंदर सिंह के कुल 11 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर करोड़ों की ज्वेलरी और नकदी बरामद की।
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