गंगा दशहरे पर हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन टूटी सड़कों और अव्यवस्था ने किया परेशान। यहां तक कि भक्तों को चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।
हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट पर गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सूरज की पहली किरण के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और पवित्र जल से तन-मन को शुद्ध किया। परिवार संग आए भक्तों ने पिंडदान और पूजा-अर्चना भी की।
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मखदूमपुर गंगा घाट पर उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : संवाद
चार किलोमीटर का रेतीला रास्ता, धूप और धूल फिर भी हौसला नहीं टूटा
गंगा घाट तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार किलोमीटर का उबड़-खाबड़, धूलभरा रास्ता पार करना पड़ा। मोटरसाइकिल और छोटे वाहन रास्ते में धंस गए। महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चे तेज धूप में पैदल चलते दिखे, फिर भी किसी ने शिकायत नहीं की क्योंकि मजिल मां गंगा थी।
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गंगा दशहरा पर स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : संवाद
उद्घाटन तो हुआ लेकिन व्यवस्थाएं अधूरी रहीं
बुधवार को जिलाधिकारी द्वारा मेले का उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन मेला स्थल तक पहुंचने के रास्ते को दुरुस्त नहीं कराया गया। श्रद्धालुओं को गड्ढों, धूल और रेत से भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई लोगों को बच्चों को गोद में उठाकर घाट तक लाना पड़ा।
गंगा दशहरा पर स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : संवाद
हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात, इस बार गंगा दशहरे का विशेष महत्व
इस वर्ष गंगा दशहरे पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बने। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और व्यतिपात योग का एक साथ आना कई दशकों बाद हुआ है। इस कारण गंगा स्नान, दान, जप, तप और व्रत का विशेष फल मिलने की मान्यता रही।
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गंगा दशहरा पर स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : संवाद
एक ही घाट पर जीवन और मृत्यु दोनों की पूजा
घाट पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए तो वहीं अनेक लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। गंगा किनारे बैठे पंडितों को श्रद्धालुओं ने आस्था से दान-दक्षिणा दी। यह दृश्य भारतीय परंपरा और संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
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गंगा दशहरा पर स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु
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भक्ति के साथ सुरक्षा भी-पुलिस तैनात, चेतावनी जारी
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। पुलिसकर्मी लगातार अनाउंसमेंट कर रहे थे कि श्रद्धालु गहरे पानी में न जाएं। घाट पर गोताखोर भी मौजूद रहे ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
मखदूमपुर गंगा घाट पर उमड़े श्रद्धालु
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गंगा ने फिर बुलाया, भक्त फिर चले आए लेकिन अगली बार व्यवस्थाएं दुरुस्त हों
श्रद्धालुओं ने अपने श्रम, धैर्य और आस्था से यह साबित किया कि मां गंगा के बुलावे पर कोई कठिनाई आड़े नहीं आती। लेकिन इस भीड़ और परेशानी से प्रशासन को सबक लेना चाहिए। यदि समय रहते रास्ते बनाए जाते, तो लाखों लोगों की यात्रा और भी सुखद बन सकती थी।