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Deoband: जमीयत के अधिवेशन का आज दूसरा दिन, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने रखा प्रस्ताव- कॉमन सिविल कोड बर्दाश्त नहीं

Sun, 29 May 2022 11:19 AM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, देवबंद
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
देवबंद में जमीयत के अधिवेशन के प्रथम चरण में कई प्रस्ताव पेश किए गए, साथ ही कुछ अहम सुझाव दिए गए। अधिवेशन में दूसरे दिन ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा शाही ईदगाह और कॉमन सिविल कोड को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। जिसका अधिवेशन में मौजूद उलमा ने खुले दिल से समर्थन किया। कहा कि कॉमन सिविल कोड को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कितना कुछ सहने के बावजूद हम चुप हैं। यह हमारे सब्र का इम्तिहान है, कहा कि यदि हमारा खाना, पहनना नहीं पसंद तो हमारे साथ मत रहो, कहीं और चले जाओ। जमीयत उलमा-ए-हिंद के दो दिवसीय अधिवेशन में उलमा देश के मौजूदा हालात समेत अनेक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। अंतिम दिन आज कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगेगी, कई अहम निर्णय भी लिए जाएंगे।

वहीं अधिवेशन के पहले दिन देश में नफरत के बढ़ते हुए दुष्प्रचार को रोकने के उपायों पर विचार किए जाने और इस्लामोफोबिया की रोकथाम के विषय में प्रस्ताव व सुझाव प्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। सद्भावना मंच को मजबूत करने पर विचार संबंधी प्रस्ताव रखा गया। जिसके तहत विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के लोगों की संयुक्त बैठक करना, आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करना, मजदूर भाइयों, किसानों और पिछड़े लोगों की सेवा करना, अनाथ, विधवाओं और मजबूर लोगों की मदद करना, नवयुवकों को नशे की आदत और यौन भटकाव से बचाने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना, संवेदनशील धार्मिक मुद्दों (जैसे गोरक्षा, धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर का उपयोग, त्योहारों के मौके पर सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल) आदि की समस्या कहीं हो तो उसका शांतिपूर्ण समाधान खोजना आदि सुझाव पेश किए गए। 
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
ज्ञानवापी मजिस्द समेत अन्य मुद्दो पर चर्चा होगी
जमीयत के राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के चर्चित मुद्दे ज्ञानवापी मस्जिद सहित अन्य धार्मिक स्थलों, वर्तमान देश के हालात सहित अन्य मुद्दे पर चर्चा के उपरांत प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। अधिवेशन के दूसरे या तीसरे चरण में इनको लेकर अहम निर्णय लेने की संभावना है। हालांकि अभी इस पर संगठन का कोई भी पदाधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। देशभर की मीडिया की नजरें भी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जमीयत के अधिवेशन पर टिकी हुई हैं। 
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाएगा विश्व इस्लामोफोबिया दिवस 
अधिवेशन में जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वक्ताओं ने वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कुछ उपाय सुझाए। जिसमें वर्ष 2017 में प्रकाशित विधि आयोग की 267 वीं रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा भड़काने वालों और सभी अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए। इस अधिवेशन में हर साल 15 मार्च को विश्व इस्लामोफोबिया दिवस मनाने की भी घोषणा की गई।

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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
शादियों में फिजूलखर्ची पर लगे प्रतिबंध
जमीयत के मंच से समाज सुधार को लेकर भी विचार रखे गए। मौलाना मोअज्जम ने इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) को लेकर रिपोर्ट पेश की, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही समाज में फैल रही कुरीतियों जैसे नशाखोरी, बाल मजदूरी सहित अन्य मुद्दों पर ध्यान दिलाया और इन्हें समाप्त करने पर जोर दिया। 
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
धर्म के खिलाफ उन्माद फैलाने वाले चैनलों पर लगे प्रतिबंध : मंसूरपुरी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना सलमान मंसूरपुरी ने इस्लाम धर्म के खिलाफ जारी नफरत ( इस्लामोफोबिया ) से संबंधित मुद्दे पर कहा कि मुसलमान अपने रवैये से ये साबित करने की कोशिश करें कि वे सिर्फ अपने धर्म को ही सर्वोपरि नहीं मानते। इस्लाम के विश्वबंधुत्व के संदेश को आम किया जाए। अंतर धार्मिक संवाद को बढ़ाने के भी प्रयास किए जाए। मुसलमान अपने क्रियाकलापों से इस्लाम के सही पैरोकार बनें। सरकार ऐसे मेनस्ट्रीम और यूट्यूब चैनलों पर रोक लगाए जो इस्लाम धर्म के खिलाफ उन्माद फैलाते हैं।
 
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अधिवेशन में बोलते मौलाना अरशद मदनी - फोटो : amar ujala
हमारे दिल बंट जाएंगे तो फिर मंदिरों-मस्जिदों का क्या होगा: नियाज
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने आपसी सौहार्द का संदेश देते हुए कहा कि अगर हम अपने दिलों को बांट देंगे तो फिर इन मंदिरों और मस्जिदों का क्या होगा। शनिवार को अधिवेशन के प्रथम चरण खत्म होने के बाद मीडिया से बातचीत में मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने कहा कि वर्तमान में हमारा देश धार्मिक भेदभाव और नफरत की आग में जल रहा है। देश में इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी उकसावे की घटनाएं बढ़ रही हैं। राजनीतिक वर्चस्व के लिए बहुसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्तेजित करना देश के साथ दुश्मनी है। ऐसे में मुस्लिमों से अपील है कि वह प्रतिक्रियावादी रवैया अपनाने के बजाय एकजुट होकर राजनीतिक स्तर पर चरमपंथी फासीवादी ताकतों का मुकाबला करें। 

 
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
अधिवेशन में 25 राज्यों से आए पदाधिकारी  
जमीयत के अधिवेशन में 25 राज्यों से दो हजार से अधिक पदाधिकारियों ने शिरकत की है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में सीधे नाम तो नहीं लिया लेकिन संघ और सरकार उलमा के निशाने पर रही। नसीहत दी गई तो साथ ही चेताया भी गया। 

अधिवेशन में पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को अतिवाद और तीव्र प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। आग को आग से नहीं बुझाया जा सकता। इसलिए सांप्रदायिकता और नफरत का जवाब नफरत नहीं हो सकता। इसका जवाब प्रेम और सद्भाव से दिया जाना चाहिए।

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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम 
अधिवेशन को लेकर पुलिस और प्रशासन स्तर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े अधिकारी अधिवेशन स्थल पर मौजूद हैं पीएसी बल के साथ पुलिस अधिकारी गश्त कर रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जगह जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। 

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मौलाना महमूद असद मदनी - फोटो : amar ujala
मदनी के बयान ने बढ़ाई गर्मी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हमारा मजहब अलग है, हमारा लिबास अलग है, हमारे खाने-पीने, पहनने का तरीका भी अलग है। यदि तुमको हमारा मजहब बर्दाश्त नहीं है तो तुम कहीं ओर चले जाओ। मौलाना मदनी ने कहा कि वे जरा-जरा सी बात पर हमें कहते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ, अरे तुम्हें मौका नहीं मिला था पाकिस्तान जाने का? हमे मौका मिला लेकिन हमने रिजेक्ट कर दिया था। जहिर है कि अंतिम दिन मौलाना महमूद मदनी का बयान गर्मी के मौसम में और तपिश बढ़ाने वाला साबित होगा।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद का अधिवेशन - फोटो : amar ujala
शाहजहांपुर के प्रोफेसर मौलाना नौमानी ने कॉमन सिविल कोड का प्रस्ताव रखते हुए इसके पीछे सरकार की मंशा को जाहिर करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को समाप्त करने के लिए सरकार इसको ला रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुल्क का कानून सबको बराबर का हक देता है। यदि सरकार कॉमन सिविल कोड को जबरन लाती हर तरह का विरोध किया जाएगा।
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