दोषी पत्नी रविता
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सजा से पहले जज ने किया सावित्री और यमराज का जिक्र
अदालत कक्ष में जब यह फैसला सुनाया जा रहा था, तब माहौल बेहद गंभीर था। सजा का एलान करने से पहले न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने प्राचीन ग्रंथों और भारतीय संस्कृति का हवाला दिया। उन्होंने 'मनुस्मृति' का जिक्र करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि 'अधर्म कभी भी धर्म से नहीं जीत सकता'।
इतना ही नहीं, न्यायाधीश ने पौराणिक प्रसंग का उदाहरण देते हुए महान भारतीय नारी 'सावित्री' का जिक्र किया, जो अपने पति के प्राण बचाने के लिए यमराज तक से भिड़ गई थीं और अपने सतित्व के बल पर उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके विपरीत, इस मामले में एक पत्नी ने अपने ही सुहाग की जीवन-लीला समाप्त करने के लिए खौफनाक साजिश रची। न्याय की इस अनूठी मिसाल और दलील ने कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया।