विलाप करती शहीद की पत्नी
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छुट्टी हो गई थी मंजूर, परिवार वाले थे बहुत खुश
बहन राखी ने बताया कि सतेंद्र छुट्टी लेकर ट्रेन से घर आता था। पहलगांव से गांव तक आने ओर जाने में ही उसके चार पांच दिन लग जाते थे। पत्नी और बहनें एक महीने की छुट्टी पर आने को कहती थी, लेकिन इतनी लंबी छुट्टी मिलती नहीं थी। इस बार उसकी बहनों ने उसे हवाई जहाज से आने को कहा था। हवाई जहाज से गांव तक पहुंचने में केवल सात आठ घंटे ही लगते थे। 19 जून से उसकी छुट्टी मंजूर हुई तो उसने भी बहनों से कहा था कि वो हवाई जहाज से ही आएगा, लेकिन शायद भगवान को कुछ ओर ही मंजूर था। इसलिए ही उसकी बहनें बार बार इस बात को याद कर फूट फूटकर रो रही हैं।