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यूपी के इस जिले में अब तक 38 कत्ल, पुलिस हर बार रही नाकाम, सबूत हैं ये पांच केस

Wed, 12 Aug 2020 01:08 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में कानून व्यवस्था खराब है। लगातार हत्याओं से दहशत बन गई है। लखनऊ और दिल्ली तक होने वाली वारदातों में बागपत का लिंक मिलता है। जेल में बैठे अपराधी मोबाइल पर हथियारों का सौदा कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन रहा। लोग अपने घरों में रहे। इसके बावजूद जिले में हत्याओं का सिलसिला चलता रहा। साल 2020 में अब तक 38 हत्याएं हो चुकी हैं। यानी हर महीने पांच हत्या और पुलिस कुछ कर नहीं पा रही है।

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केस - एक
बासौली गांव में एक जून को युवकों के दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया, जो पुलिस की लापरवाही से खून-खराबे में बदल गया। गांव में तीन युवकों की हत्या कर दी गई। पुलिस सिर्फ जांच में उलझी है, अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

केस - दो
कूड़ी गांव में 22 जून को कुख्यात परमवीर तुगाना और उसके साथियों पर फायरिंग की गई। अस्पताल में उपचार के दौरान परमवीर की मौत हो गई। पुलिस ने खुलासा किया कि जिला पंचायत चुनाव की रंजिश में सुनील राठी ने हत्या की वारदात कराई है।
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केस - तीन
बदरखा गांव में रालोद नेता देशपाल बदरखा की सात जुलाई को हत्या कर दी गई। सरेआम हुई हत्या में भी पुलिस की लापरवाही रही। बदरखा में पिछले दो साल से बन रहे तनाव के माहौल को पुलिस-प्रशासन के लोग आखिर क्यों नहीं भांप सके।

यह भी पढ़ें: भाजपा नेता की हत्या मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, बदमाशों ने ऐसे दिया था वारदात को अंजाम

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मौके पर जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
केस - चार
गांधी गांव में युवकों के बीच हुए झगड़े पर पुलिस ने लीपापोती की। यही वजह रही है कि फेसबुक को लेकर शुरू हुआ झगड़ा रक्षाबंधन के दिन खून-खराबे में बदल गया। तीन अगस्त को रवित की हत्या कर दी गई।

केस - पांच
बड़ौत में दिनदहाड़े रंजिश के चलते सात अगस्त को किशोरी की हत्या कर दी गई। पुलिस कोतवाली से कुछ ही दूर हत्या हो गई। आमजन सहमा हुआ है और पुलिस का खौफ अब बदमाशों के बीच नहीं रह गया है। कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस ने एडीजी की बात नहीं मानी
अनलॉक शुरू होते ही एडीजी राजीव सभरवाल जिले में पहुंचे थे। पुलिसकर्मियों की बैठक में एडीजी ने साफ कहा था कि अनलॉक होने के साथ ही अपराध का ग्राफ बढ़ सकता है। ऐसे में बाइक सवारों की चेकिंग और अपराधियों की हिस्ट्री खंगालने में सख्ती बरती जाए। लेकिन स्थानीय पुलिस के ढीले रवैये के कारण हालात अनियंत्रित हैं।

क्राइम कंट्रोल के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिस स्तर पर पुलिस की चूक मिली है, वहां पर कार्रवाई होती है। थानाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। - अजय कुमार सिंह, एसपी

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