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Coronavirus: हम तो दुश्मनों से नहीं हारे, यह तो कोरोना है.., ड्यूटी पर डटे कारगिल के योद्धाओं ने बताया, कैसे जंग में 24 घंटे हथेली पर रहती थी जान

Tue, 07 Apr 2020 06:39 PM IST
Dimple Sirohi मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ में कोरोना वायरस - फोटो : amar ujala
1999 के कारगिल युद्ध के योद्धा मेरठ के मेडिकल कॉलेज में कोरोना वायरस वार्ड के बहार ड्यूटी कर रहे हैं। सैनिक कल्याण बोर्ड की तरफ से आर्मी के रिटायर्ड सूबेदार और कांस्टेबल यहां ड्यूटी पर लगाए गए हैं। कोरोना वार्ड के बाहर जहां यह योद्धा डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं इन योद्धाओं का अनुशासन भी साफ झलकता है।

मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी से चंद कदमों की दूरी पर तीन मंजिला नवनिर्मित भवन में कोरोना संक्रमण वार्ड बनाया गया है। जहां मेरठ के अलावा गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर शामली और आसपास के जिलों के मरीज भर्ती हैं। सुरक्षा के तौर पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने निजी सिक्योरिटी भी तैनात की है। निजी सिक्योरिटी में आर्मी के रिटायर्ड सूबेदार और कांस्टेबल हैं।  
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meerut medical - फोटो : amar ujala
यहां बिल्डिंग के 50 कदम तक किसी को भी आने की इजाजत नहीं है। कोरोना वार्ड के बाहर रिटायर्ड सूबेदार विनोद कुमार, कांस्टेबल रामकुमार और जितेंद्र सिंह तैनात थे। पहले तो देखते ही विनोद कुमार ने कहा कि यहां आना सख्त मना है। कोरोना वार्ड है, इसलिए यहां से दूर ही चले जाइए। बाद में जब उनसे बातचीत की गई तो रिटायर्ड सूबेदार विनोद कुमार ने कहा कि यह तो कोरोना वार्ड है। हम तो कारगिल युद्ध में भी दुश्मनों से पीछे नहीं हटे थे।

कहा  कि यह संक्रमण किसी युद्ध से कम नहीं है पर कारगिल युद्ध जैसा भी नहीं। इसकी सावधानी भी यही है कि बच कर रहें। लेकिन युद्ध में तो 24 घंटे जान हथेली पर रहती थी। उस समय भी देश की सेवा कर रहे थे और आज भी। जहां किसी को भी कुछ भी सकता है, कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है, पर जो डॉक्टर इलाज कर रहे हैं वह भी कम नहीं है, हार नहीं माननी है। कोरोना वार्ड भी युद्ध के मैदान से कम नहीं।
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meerut medical - फोटो : amar ujala
विनोद कुमार कारगिल में दराज सेक्टर में तैनात रहे। वह उग्रवादी ओपरेशन में कुपवाड़ा में रहे। पट्टन बारामुला में 34 करोड़ रुपये पूरी टीम ने पकड़े और सरकारी खाते में जमा कराए। वहीं दूसरे गेट के बाहर तैनात हरि ने बताया कि 30 साल फौज में रहकर देश की सेवा की।

कारगिल युद्ध मे 3 तीन तीन दिन खाना नहीं मिला, नीचे बर्फ, सामने दुश्मन और ऊपर से बरसते गोलों से कभी कदम नहीं खींचे, अब पूरा देश कोरोना से लड़ रहा है, इसमें भी हम जीत जाएंगे। 8-8 घंटे की ड्यूटी बिना खाए-पिये कर रहे हैं। घर मे जाते हैं तो किसी से मिल नहीं रहे हैं और अलग कमरे में सोना हो रहा है ।

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Coronavirus - फोटो : amar ujala
घर जाने में डर लगता है  
कोरोना वार्ड के बहार दोनों तरफ मुख्य गेटों पर पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। इंस्पेक्टर विनय कुमार आजाद के साथ सिपाही प्रंचल पंवार, जितेंद्र पुंडीर, जोरावर सिंह, दीपेन्द्र के अलावा महिला सिपाही संतोष धामा तैनात थीं। सुबह 7 बजे से रात 8 बजे और रात के लिए अलग शिफ्ट लगाई गई है।

इंस्पेक्टर विनय कुमार आजाद ने कोरोना वार्ड से 50 कदम दूर रुकने का इशारा कर दिया और कहा कि यहां आना ही अपने आप में खतरा है। यहां न आइए, यही बचाव है। क्योंकि पूरी सुरक्षा और सावधानी ड्यूटी के दौरान भी बरती जा रही है।
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medical collage meerut
पत्नी बीमार लेकिन नहीं जा पाया घर: इंस्पेक्टर विनय
इंस्पेक्टर विनय कुमार आजाद ने बताया कि घर पर पत्नी बीमार है लेकिन ऐसे समय में घर नहीं जाना हुआ। पहले संक्रमित इलाके शास्त्रीनगर के बाद मेडिकल में ड्यूटी है। पुलिस लाइन स्थित पुलिस क्लब में एक-एक कमरे में अलग रहना हो रहा है। पुलिस की नौकरी में जिम्मेदारी पहला अनुशासन है। जिससे बिल्कुल भी पीछे नहीं हटा जा सकता। पत्नी और बच्चों से रात में मोबाइल पर बात होती है तो यही कहा जाता है कि बचकर रहें, बस कुछ हो न जाए।  

इंस्पेक्टर का कहना है की सुबह 7 बजे से लेकर रात में 8 बजे ड्यूटी खत्म करके ही सैनिटाइजर होकर उसके बाद ही भोजन और पानी की व्यवस्था है। कोरोना वार्ड के बाहर ड्यूटी के समय न पानी पी सकते हैं और न ही कुछ खा सकते हैं। पुलिस लाइन में किसी से न मिल सकते हैं और सिर्फ कमरे में ही रहना है।
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आइसोलेशन वार्ड - फोटो : अमर उजाला
100 मीटर तक हाई रिस्क जोन कोरोना वार्ड के सुरक्षा प्रभारी इंस्पेक्टर विनय कुमार आजाद का कहना है कि तीन मंजिला भवन में कोरोना वार्ड है। जहां मरीजों के आने का अलग गेट है और अन्य स्टाफ के लिए दूसरे गेट से प्रवेश है।

भवन के 100 मीटर के दायरे में हाई रिस्क जोन है। जहां डॉक्टरों के अलावा कोई नहीं आ सकता। वर्दी की ड्यूटी के बाद गर्म पानी से धुलाई की जा रही है।
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