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कोरोना का कहर: तड़प रही मानवता, ‘लाचार’ हुई व्यवस्था, घुट-घुटकर मर रहे लोग, देखिए तस्वीरें

Sat, 01 May 2021 02:27 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
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अपनों के लिए रोते बिलखते परिजन। - फोटो : amar ujala
मेरठ शहर में हर ओर चीख पुकार मची है। अस्पतालों में बेड नहीं हैं और जरूरी दवाओं की कालाबाजारी हो रही है। आम आदमी घुट-घुटकर मर रहा है। एक तो अपनों के जाने का गम और दूसरा ‘लाचार व्यवस्था’ उसके दुख को दोगुना कर रही है। पलकें भीगीं हैं और आत्मा तड़प रही हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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मेडिकल कॉलेज में बिलखते परिजन। - फोटो : amar ujala
वहीं महामारी के इस दौर में कुछ चिकित्सकों ने मरीजों से मुंह मोड़ लिया है। अगर उपचार भी कर रहे हैं तो चार से पांच गुना अधिक फीस वसूल रहे हैं। ऐसे में लोग अपनी व्यथा किससे कहें?

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मेडिकल कॉलेज में तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala
मेरठ में अब मृतकों के शवों को उठाने वाला भी कोई नहीं है। पड़ोसी तो दूर परिवार के लोग भी मदद के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। न्यू देवपुरी में विद्युत उपकरणों के व्यापारी की मौत के आठ घंटे बाद भी शव घर में ही पड़ा रहा। सामाजिक संगठन ने आगे आकर मदद का प्रयास किया, लेकिन दो लोग शव को ले जाने में असमर्थ थे। पड़ोसियों से मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। करीब आधा किलोमीटर पीपीई किट की बजाय चादर में लपेटकर एंबुलेंस तक शव पहुंचाया गया। इसके बाद संस्कार हो पाया।

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मेडिकल कॉलेज में तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala
व्यापारी की कोरोना से मौत हुई थी। घर में पत्नी और बेटे ने पड़ोसियों से मदद मांगी। मदद न मिलने पर जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी को सूचना दी गई। इसके अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा पहुंचे। उन्होंने व्यापारी की मौत की सूचना संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता नटराज को दी। लंबे इंतजार के बाद एंबुलेंस पहुंची। गली संकरी होने के कारण आधा किलोमीटर दूर ही एंबुलेंस को रोकना पड़ा। न पीपीई किट और न ही कोई सुरक्षा उपकरण।
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मेरठ में ऑक्सीजन न मिलने से तड़प रहे मरीज। - फोटो : amar ujala
शव को एक चादर में लपेटकर जैसे तैसे एंबुलेंस तक पहुंचाने का दोनों ने प्रयास किया। बाद में दुष्यंत और मृतक के पुत्र ने हिम्मत कर शव को एंबुलेंस तक पहुंचाया। इस बीच गंगा मोटर कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने सूरजकुंड श्मशान में संपूर्ण व्यवस्था कराई। समिति के द्वारा प्लेटफार्म पर लकड़ी और अंतिम संस्कार के सामान की व्यवस्था की गई।

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