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धर्मांतरण: कोचिंग टयूटर की बहन ने पढ़ाया मुहब्बत का पाठ, सौरभ ने रिहान बनकर शादमा से की बात, निकाह और फिर

Tue, 28 Sep 2021 10:52 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मौलाना कलीम सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
धर्मांतरण के शिकार हुए मेरठ के लावड़ निवासी सौरभ गुप्ता की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। 12 साल पहले कोचिंग सेंटर संचालक की बहन ने सौरभ को रिहान बनाकर खतौली की शादमा से दोस्ती कराई। शादमा की मुहब्बत में वह खतौली में ही बस गया। 40-40 दिन की जमात में तीन बार गया और नमाज पढ़ी। मुस्लिम समुदाय के त्योहार मनाए। खतौली के फुलत में मौलाना कलीम ने उसका धर्मांतरण कराया। एटीएस ने सौरभ, सुशील जैन समेत तीन लोगों से इस बारे में जानकारी जुटाई है।

बता दें कि एटीएस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी को रिमांड पर लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटा ली है। आठ साल पहले खतौली में धर्मांतरण के मामले में मौलाना के खिलाफ लावड़ का सौरभ गुप्ता गवाही दे सकता है। एटीएस सौरभ को अपने साथ लेकर गई है। आठ साल पहले सौरभ और उसके एक साथी का धर्मांतरण कराए जाने की जानकारी सुरक्षा एजेंसी को मिली, जिसकी पड़ताल की जा रही है। अवैध धर्मांतरण और विदेश से फंडिंग लेने के मामले में फुलत के मौलाना कलीम सिद्दीकी को गुरुवार रात को एटीएस ने गिरफ्तार किया था।
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मौलाना कलीम सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
फुलत के मौलाना कलीम सिद्दीकी कई साल से गैर समुदाय के लोगों का धर्मांतरण करा रहा था। फंडिंग कराने का ठेका भी मौलाना के पास ही था। इसकी पूरी आशंका है कि मौलाना का जाल मेरठ में भी फैला हुआ है। एटीएस को लावड़ के सौरभ गुप्ता से काफी जानकारी मिली। सौरभ 11 साल तक खतौली और मुजफ्फरनगर में रिहान बनकर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहा।  

भाजपा के एक जनप्रतिनिधि को इसकी जानकारी लगी तो उसने सौरभ और मुजफ्फरनगर के सुशील जैन को वापस हिंदू समाज में लाने की योजना बनाई। करीब 20-25 दिन पहले हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने खतौली में कार्यक्रम रखकर भव्य यज्ञ कराया और दोनों युवकों की वापसी हिंदू धर्म में कराई। सौरभ अब शादमा और अपने दो बच्चों को छोड़कर वापस लावड़ में रह रहा था। उसने एटीएस से धर्मांतरण होने की शिकायत की थी। 
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धर्मांतरण का मामला: मौलाना कलीम सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
12 साल तक यूं जाल में फंसा रहा सौरभ
सौरभ गुप्ता ने बताया कि वह लावड़ में एक कोचिंग सेंटर में पढ़ता था। 2009 में कोचिंग संचालक की बहन ने शादमा का नंबर दिया था। मैंने रिहान नाम बताकर उसको कॉल की। इस पर शादमा ने मुझे धमकाया और कहां कि कॉल करोगे तो शिकायत कर दूंगी। 15 दिन बाद शादमा ने खुद ही मुझे कॉल की। वह बोली थी- मैं जानती हूं कि तुम रिहान नहीं, बल्कि सौरभ गुप्ता हो। इस्लाम कबूल कर लो तो मैं दोस्ती कर लूंगी। उसके बाद फोन पर बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। वर्ष 2010 में मुजफ्फरनगर में शादमा से मुलाकात हुई।  

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धर्मांतरण का मामला: मौलाना कलीम सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
एक मुस्लिम युवक ले गया फुलत
सौरभ के मुताबिक शादमा के साथ एक मुस्लिम युवक था, जो उसे फुलत ले गया। इसकी जानकारी लगने पर परिजन वहां पहुंचे और पांच-छह दिन बाद वापस ले आए। लेकिन वह शादमा के प्रेम में पड़ चुका था। इसी बीच, हाफिज अबरार ने सौरभ से संपर्क किया और उसने फुलत से उसे 40 दिन की जमात पर बाहर भेज दिया। वहां से लौटा तो मौलाना कलीम सिद्दीकी से उसकी मुलाकात हुई। उसने कारोबार कराने की बात कही और पुरकाजी में इसरार के पास भेज दिया। वहां भी कलीम ने आकर इसरार से परचून की दुकान खुलवाने की बात कही। दुकान खोलने से पहले ही सौरभ को फिर से 40 दिन की जमात पर भेज दिया। 
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यपी एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार, मौलाना कलीम सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
बड़ौत में खुलवाई परचून की दुकान
सौरभ ने बताया कि जमात से लौटने के बाद कलीम ने उसे बड़ौत में परचून की दुकान खुलवा दी। दुकान नहीं चली तो फलों का ठेला लगवा दिया। इसी दौरान कलीम ने शादमा से उसका निकाह करा दिया। उसके बाद कुछ दिन आढ़त का भी काम किया। इस दौरान फिर जमात में भेजा गया। मदरसे में पढ़ाई भी की। नमाज अदा करना भी सिखाया गया। वह अब मुस्लिम समुदाय के रीति रिवाज के तौर तरीकों से वाकिफ हो गया था। बाद में अहसास हुआ और फिर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं से संपर्क किया। उन्होंने मौलाना कलीम के चंगुल से छुड़ाया।
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