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घुंघरू की खनक और तबले की ताल पर बाल कलाकारों ने दीं सुंदर नृत्य की प्रस्तुतियां, तस्वीरें

Mon, 13 May 2019 07:12 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते बाल कलाकार - फोटो : अमर उजाला
तबले की थाप और शास्त्रीय संगीत के सुरों पर बाल कलाकारों ने सुंदर नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। घुंघरूओं की खनक संग ताल मिलाकर कलाकारों ने शिव लीला और कृष्ण लीला का मंचन किया। कला निधि संगीत महाविद्यालय की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ।
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि यह समारोह मेरठ में सेंट जोसफ स्कूल कैंट में आयोजित हुआ। शुभारंभ मुख्य अतिथि पंडित डॉ. संतोष नाहर (ऑल इंडिया रेडियो दिल्ली के वायलिन वादक) ने किया।
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते बाल कलाकार - फोटो : अमर उजाला
इस आयोजन में अन्य अतिथियों में प्रियांशु कुमार सचिव द अध्ययन स्कूल, प्रो. पिंटू मिश्रा प्राचार्य सुभारती कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट एंड फैशन डिजायनिंग, रमेश गिल, अनिरुद्ध गायेल संस्कार भारती व सुरेश यादव संस्कार भारती से शामिल रहे।

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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति देते बाल कलाकार - फोटो : अमर उजाला
आयोजन में कलाकारों ने कथक, भरतनाट्यम सहित हिपहॉप व वेस्टर्न नृत्य की भी प्रस्तुति दी। छात्राओं ने राग जय जयवंती पर आधारित भजन शिव कैलाशो के वासी पर नृत्य प्रस्तुति दी। शुद्ध कथक में तराना व नृत्य नाटिका कृष्णा का मंचन किया। कृष्णा नृत्यनाटिका में भगवान श्रीकृष्ण के बालकाल से यौवन तक के सभी स्वरूपों का सजीव चित्रण किया। गुजराती व कालबेलिया लोकनृत्य का भी प्रदर्शन किया।
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते बाल कलाकार - फोटो : अमर उजाला
वहीं आयोजन को सफल बनाने में संस्थान की निदेशिका गुंजन सिंह ने रमेश गिल, विशाल कोली, दिव्यांशी, श्रुति, साक्षी, धृति, सपना खुराना व विकास का आभार दिया। कलानिधि संगीत महाविद्यालय की संस्थापिका गुंजन सिंह कथक के विश्व प्रसिद्ध गुरु पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की शिष्या हैं।
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते बाल कलाकार - फोटो : अमर उजाला
वायलिन में पांचवां तार लगाकर किया आविष्कार 
पंडित संतोष नाहर ने बताया कि उन्होंने अपने वायलिन में पांचवां तार लगाया है। वायलिन चार तारों का होता है, लेकिन पंडित नाहर का वायलिन पांच तारों वाला है। हालांकि इस आविष्कार को उन्होंने कोई नया नाम नहीं दिया है। उनके अनुसार जिस प्रकार गले में पाताल, धरती, आकाश तीन ऑक्टे होते हैं, उसी को समेटने का प्रयास उन्होंने अपने वायलिन में किया है। वायलिन में बदलाव के अलावा कुछ नए राग भी रचे हैं। जैसे नटभैरव और रागकली को मिलाकर नटकली बनाया है। चंद्रजोग राग भी बनाया है। नटकली भोर का राग व चंद्रजोग रात्रि प्रहर का राग है।
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आयोजित सांस्कृतिक संध्या में डांस की प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
कुंभ में संगीत समारोह राजनीतिक प्रस्तुति
डॉ. नाहर कहते हैं कि मुफलिसी के दिनों में वॉशिंग पाउडर निरमा के विज्ञापन के लिए वायलिन बजाया था। पंडित भीमसेन जोशी, पंडित राजन साजन मिश्र, छन्नू महाराज, उस्ताद राशिद खान, उस्ताद रईस खां सभी के साथ वायलिन बजा चुके हैं। हरिबल्लभ समारोह से लेकर देश में होने वाले सभी बड़े शास्त्रीय समारोहों में प्रस्तुति दे चुके हैं। कुंभ 2019 में हुए सांस्कृतिक समारोह के लिए पंडित नाहर कहते हैं वो विशुद्ध रूप से राजनीतिक आयोजन था। भागलपुर घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित नाहर मूलत: इलाहाबाद के हैं।

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