भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को कड़ी सुरक्षा के बीच गुरुवार देर रात 2:40 बजे सहारनपुर जेल से रिहा कर दिया गया। हजारों समर्थकों की भीड़ ने जय भीम के नारों के बीच रावण का स्वागत किया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर में अलर्ट किया गया है।
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फाइल फोटो
बता दें कि पिछले साल सहारनपुर में दलितों और राजपूतों में हुई हिंसा में एक संगठन सुर्खियों में आया था। जिसका नाम भीम आर्मी है और उसका संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण है। आगे जानिए मायावती को रावण से क्यों है खतरा?
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mayawati
मायावती ने सहारनपुर में सभा के दौरान साफ कह दिया था कि किसी संगठन के बजाय बसपा के बैनर तले कार्यक्रम करो किसी की हिम्मत नहीं होगी रोकने की। उनके इस बयान से साफ दिखता है कि किसी और राजनीतिक पार्टी से पहले मायावती को ही भीम आर्मी संगठन से खतरा नजर आ रहा हैं। कहीं दलित इसी संगठन से जुड़कर बसपा पार्टी का नाम तक न भूल जाए।
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भीम आर्मी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
वहीं पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर को भारी समर्थन मिलता दिखा। इस रैली में यूपी के अलावा बिहार, हरियाणा, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में दलित यहां पहुंचे थे।
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चंद्रशेखर ऊर्फ रावण
सहारनपुर हिंसा के बाद सुर्खियों में आए चंद्रशेखर रावण की ताकत से हर किसी राजनीतिक पार्टी को खतरा पैदा हो गया। क्योंकि रावण के पीछे काफी संख्या में दलितों की ताकत साफ दिख रही है।
हालांकि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण ने शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में कहा। 2019 में बीजेपी को हराना ही मकसद है। भीम आर्मी तो उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी। देश में बीजेपी के खिलाफ बनने वाले महागंठबंधन को भीम आर्मी सपोर्ट करेगी। भीम आर्मी जल्द ही देशभर में बहुजन समाज को जागरूक करने का काम करेगी। रावण ने मायावती को अपनी बुआ बताते हुए कहा कि उनसे कोई विरोध नहीं है। बुआ ने समाज के लिये बहुत काम किया हैं।
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