फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी के इस शहर में मौजूद है एक ऐसा कब्रिस्तान जहां 1500 से ज्यादा अंग्रेज हैं दफन

Sat, 19 Jan 2019 05:37 PM IST
दुष्यंत शर्मा शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 8
cemetery
1857 की क्रांति का केंद्र रहे मेरठ में आज भी 1500 से अधिक अंग्रेजों की कब्रें मौजूद हैं। 1857 के युद्ध सहित द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए तमाम अंग्रेज अफसरों और सिपाहियों को मेरठ में ही दफनाया गया था। आज भी उनके वंशज पुरखों की कब्रों पर फूल चढ़ाने आते हैं। इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो मेरठ की तस्वीर में तमाम प्रमुख घटनाओं के रेखाचित्र मिलेंगे। इन्हीं में से एक है लेखानगर स्थित सेंट जोंस सिमिट्री।


 
विज्ञापन

2 of 8
cemetery
1810 में स्थापित हुआ यह कब्रिस्तान आज भी विदेशियों के आकर्षण का केंद्र है। इस कब्रिस्तान में यूरोपियन सिपाहियों, 1857 की क्रांति में मारे गए पहले अंग्रेज सैनिक सहित अंग्रेज अफसर व उनके परिवार के सदस्यों को दफनाया गया था। आगरा डाइस के  अंतर्गत आने वाले इस कब्रिस्तान की सेंट जोंस चर्च की सिमिट्री कमेटी देखभाल करती है। 


 
विज्ञापन

3 of 8
cemetery
1500 से अधिक अंग्रेज हैं यहां दफन
यूरोपियन जब उत्तर भारत में आए और यहां रहना शुरू किया तो उन्हें अपने लिए एक कब्रिस्तान की आवश्यकता महसूस हुई। इसके तहत मेरठ में रेसकोर्स के पास पहले एक छोटा कब्रिस्तान बनाया गया। बाद में बड़े कब्रिस्तान के रूप में लेखानगर, सेंट जोंस चर्च के आगे इस बड़े कब्रिस्तान को बनाया गया। यहां आज भी 1500 से अधिक कब्रें हैं। अधिकांश कब्रें अंग्रेजों व उनके परिवार जनों की हैं। 1810 में यह कब्रिस्तान स्थापित हुआ। आज भी शहर की बड़ी किश्चियन आबादी इस कब्रिस्तान का प्रयोग करती है। लगभग 23 एकड़ में यह कब्रिस्तान फैला है। यहां दो शिलालेख भी लगे हैं, जो 1808 से 1810 के काल को दर्शाते हैं। 

4 of 8
cemetery
कब्रिस्तान में बने हैं वॉर मेमोरियल
कब्रिस्तान में तीन प्रमुख सेक्शन हैं, जो अलग -अलग बने हैं। ये सेक्शन उन सिपाहियों की कब्रों के हैं, जिनकी देखरेख कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन करता है। इन सेक्शन में उन सिपाहियों के शरीर और अवशेष लाकर दफनाए गए, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मारे गए थे। उनके नामों को पत्थरों पर खुदवाया गया। उन कब्रों पर कशीदाकारी वाली मीनारें, गुंबद व स्मारक बनवाए गए हैं। ये सिपाही जिस रेजिमेंट के थे, उन्हीं की ओर से ये कब्रें बनवाई गईं।  
विज्ञापन

5 of 8
cemetery
क्रांति का केंद्र रहा है मेरठ
मेरठ 1857 की क्रांति का केंद्र रहा है। अधिकांश कब्रें यूरोपियन सिपाहियों की हैं, जो युद्धों में मारे गए। उन सिपाहियों की रेजिमेंट ने यहां स्मारक बनवाकर उन्हें श्रृद्धांजलि दी है। हर साल उन सैनिकों के परिवार के सदस्य यहां अपने पूर्वजों को नमन करने आते हैं।  - डॉ. अमित पाठक, इतिहासकार
विज्ञापन

6 of 8
cemetery
बच्चों की कब्रों की संख्या अधिक
सेंट जोंस सिमिट्री में अंग्रेज परिवारों के बच्चों की कब्रें काफी हैं। यूरोप से हिंदुस्तान आकर बसने के कारण विदेशी बच्चे काफी बीमार पड़ते थे। हिंदुस्तान का गर्म मौसम, बदला पानी उन्हें सूट नहीं होता था। यहां के वातावरण के अनुसार बच्चे खुद को ढाल नहीं पाते थे और उन्हें कालरा, फूड प्वाइजनिंग की बीमारी हो जाती थी।  
विज्ञापन

7 of 8
cemetery
1857 क्रांति में मारा गया पहला अंग्रेज यहां है दफन
इस कब्रिस्तान में 10 मई 1857 के विद्रोह में मारे गए पहले अंग्रेज सिपाही की कब्र है। जॉन फिनिस नामक यह अंग्रेज 11वीं सेना का सेनानायक था। 1857 में जब सिपाहियों को चर्बी लगे कारतूसों को मुंह से खोलने का आदेश दिया गया तो जॉन फिनिस सैनिकों पर कारतूस चलाने का दबाव बनाने लगा। उसकी अपनी 11वीं पैदल सेना के सिपाहियों ने यह हुक्म मान लिया। लेकिन 20वीं पैदल सेना के सिपाहियों ने इंकार कर दिया। 
विज्ञापन

8 of 8
cemetery
सख्ती करने पर 20वीं पैदल सेना के सिपाहियों ने 10 मई 1857 की शाम को जॉन फिनिस पर परेड ग्राउंड में गोली चला दी। उसके बाद फिनिस को यहीं दफनाया गया। साथ ही 1857 की क्रांति में मारे गए 50 यूरोपियन सैनिकों में से 32 को इसी कब्रिस्तान में दफनाया गया। इसमें 9 की पक्की कब्रें अभी शेष हैं, जिन्होंने देखने हर वर्ष विदेशी यहां आते हैं। सितंबर से फरवरी के बीच मुख्य रूप से इंग्लैंड, आयरलैंड व स्कॉटलैंड के लोग कब्रिस्तान में आते हैं। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें