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जज्बा : पारुल ने खूब सहे ताने पर नहीं डगमगाया हौसला, साइकिल से जाती थीं स्टेडियम, पढ़िए संघर्ष की पूरी कहानी

Tue, 03 Oct 2023 09:24 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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पारुल चौधरी। - फोटो : अमर उजाला
चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम्स में स्टीपल चेज में रजत और दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट बेटी पारुल चौधरी का सफर गांव की चकरोड से शुरू हुआ था। यहां तक पहुंचने के लिए पारुल ने कड़ा संघर्ष किया। 24 घंटे में चांदी के बाद सोना जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

दौराला के इकलौता गांव निवासी कृष्णपाल सिंह ने बताया कि उनकी बेटी पारुल साइकिल से सिवाया टोल प्लाजा तक जाती थी, वहां पार्किंग में साइकिल खड़ी करके टेंपो से कैलाश प्रकाश स्टेडियम पहुंचती थीं। लोगों के ताने भी सहने पड़ते थे। बेटी ने देश का नाम रोशन करते हुए हमारा सीना चौड़ा कर दिया है। पारुल ने इसी वर्ष केरल में आयोजित स्टीपल चेज में गोल्ड मेडल जीता था।
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पारुल चौधरी। - फोटो : अमर उजाला
एशियन चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। एशियन गेम्स से पहले वह पेरिस ओलंपिक 2024 का कोटा भी ले चुकी हैं। पारुल चौधरी प्राथमिक प्रशिक्षण कैलाश प्रकाश स्टेडियम में लिया है। 
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
उनके कोच रहे कोच गौरव त्यागी ने बताया कि पारुल ने दो माह पहले ही थाइलैंड के बैंकाक में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 2018 एशियन गेम्स में भी पारुल पदक जीत चुकी हैं। पारुल दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 

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पारुल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मंगलवार को चीन में आयोजित एशियन गेम्स में पारुल चौधरी के स्वर्ण पदक जीतने की खबर जैसे ही स्टेडियम पहुंची तो वहां अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। पारुल के साथ अभ्यास करने वाले साथी खिलाड़ियों ने स्टेडियम में मिठाई बांटकर अपनी खुशी जाहिर की। 
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
दौराला के गांव इकलौता में उनके घर पर खुशी मनाई, मिठाई बांटी। ग्रामीण ढोल नगाड़े लेकर पारुल के पिता कृष्णपाल व परिजनों को बधाई देने पहुंचे। प्रधान जान धनकड़ का कहना है कि पारुल ने गांव, जिले, प्रदेश व देश का नाम रोशन किया है। देर रात तक पारुल के घर जश्न का माहौल था।
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पारुल चौधरी की मां और परिवार के अन्य सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
मां बोलीं, बेटी ने किया गर्व से सिर ऊंचा
बेटी की इस कामयाबी पर मां राजेश देवी की आंखें भर आईं। मां राजेश देवी ने बताया कि उन्होंने शुरु से ही बेटों और बेटियों में कोई अंतर नहीं समझा। पिता कृष्णपाल व उन्होंने बच्चों को अच्छी परवरिश दी और हमेशा देश का नाम रोशन करने की सीख दी। आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है, जिसने उनके साथ देश का नाम भी रोशन किया। उन्होंने दूसरे अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वह भी बेटियों को आगे बढ़ने का मौका दें। बेटियां किसी भी वर्ग में लड़कों से कम नहीं हैं। आज बेटियां देश का सीना गर्व से चौड़ा कर रही हैं।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
बोले पिता, बेटी की मेहनत लाई रंग
पिता कृष्णपाल का कहना है कि इस दिन के लिए बेटी ने कड़ा अभ्यास किया। बेटी की मेहनत रंग लाई। अब उन्हें उस दिन का इंतजार है जब उनकी बेटी ओलंपिक में देश के लिए सोना लेकर आएगी। उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी यह कर दिखाएगी। अच्छा लगता है कि जब बच्चे कामयाब हो जाते हैं। वैसे तो बच्चों को पिता के नाम से जाना जाता है, लेकिन उस समय सिर गर्व से और ऊंचा हो जाता है जब पिता को उनके बच्चों के नाम से पहचाना जाता है।

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पारुल चौधरी। - फोटो : amar ujala
क्षेत्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता से शुरू किया दौड़ना
भराला गांव के बीपी इंटर कॉलेज से बड़ी बहन प्रीति चौधरी के साथ पारुल चौधरी ने दौड़ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में बड़ी बहन से ही पारुल की प्रतिस्पर्धा रही। दोनों ने ही 1600 और तीन हजार मीटर में दौड़ना शुरू किया। चयन के दौरान बहन से ही प्रतिस्पर्धा होने के बाद परिजनों ने बड़ी बहन को पांच हजार मीटर में दौड़ने की सलाह दी। बहन के साथ शुरू हुई प्रतिस्पर्धा के बाद पारुल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हंगरी में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक से चूक जाने के बाद भी पारुल ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था।
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पारुल चौधरी - फोटो : amar ujala
किसान परिवार से हैं पारुल
दौराला के इकलौता गांव निवासी कृष्णपाल सिंह खेती करते हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा राहुल दीवान टायर फैक्टरी में मैनेजर है, दूसरे नंबर की बेटी प्रीति सीआईएसएफ में स्पोर्ट्स कोटे से दरोगा है। तीसरे नंबर की पारुल चौधरी हैं। वह रेलवे में टीटीई हैं। चौथे नंबर का बेटा रोहित यूपी पुलिस में है। पारुल और प्रीति ने भराला गांव स्थित बीपी इंटर कॉलेज से कक्षा 10 व इंटर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद मेरठ कॉलेज मेरठ से ग्रेजुएशन की। पटियाला पहुंचकर विवि टॉपर रही।

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