केतन के घर के बाहर आर्मी अफसप
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पता नहीं उसे कितनी चोट लगी है
शाम से ही मां का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ऊषा कहती हैं कि शाम से आर्मी वाले आ रहे हैं। मेरे बेटे केतन से मेरी बात तो करवा दो। मेरा इकलौता लाल, पता नहीं उसे कितनी चोट लगी है। मेरा मन नहीं मान रहा। मेरी आंखें सूख चुकी हैं। कोई है जो मेरे बेटे से बात करवा दे। इस बीच आर्मी अफसर कहते हैं कि माताजी, केतन शर्मा ठीक हैं। उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है। उन्हें चोट लगी है, वैसी कोई बात नहीं है। ऊषा फिर रोने लगती हैं। तभी आर्मी के एक अफसर ने कहा कि मुझे भी बेटा समझो। मैं तो आपका बेटा हूं। बात करवा देंगे। आप यकीन तो करो कि मेजर केतन ठीक हैं।