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...और बन गया जिंदगी का अंतिम सफर, धमाका हुआ और बिखरते चले गए डब्बे

Sun, 20 Aug 2017 01:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर, कपिल कुमार
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जिंदगी का अंतिम सफर बना
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का सफर कई मुसाफिरों के लिए अंतिम यात्रा बन गई। चारों तरफ  खून से लथपथ लोग, चीखती-चिल्लाती महिलाएं और मदद के लिए दौड़ते लोग। शनिवार देर शाम यह वीभत्स नजारा खतौली की उस स्पॉट का है, जहां कुछ देर पहले ट्रेन हादसा हुआ। 
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बड़ा रेल हादसा
ट्रेन का खतौली में स्टॉपेज नहीं है, लिहाजा ट्रेन हवा की माफिक कसबे से होकर गुजरती है। दिल्ली से चली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ने शनिवार शाम 5.30 बजे धड़धड़ाते हुए खतौली स्टेशन क्रॉस किया। स्टॉपेज नहीं होने की वजह से ट्रेन तेज गति से ही गुजरती है। 
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घर में घुसी रेल
यही वजह थी कि ट्रेन कुछ ही सेकेंडों में कसबे के बाहरी छोर पर पहुंच गई। सोमवार को हरिद्वार में सोमती अमावश्या होने की वजह से दूसरे प्रांतों के लोग भी ट्रेन से धार्मिक नगरी जाने के लिए सफर कर रहे थे। यात्रियों में महिलाओं की संख्या भी बहुतायत में थी। 

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रेल हादसा
अचानक हादसा हुआ और ट्रेन के डिब्बे बिखरते चले गए। कई डिब्बे तो एक-दूसरे पर चढ़ गए। ट्रेन के कुल 21 में से 11 डब्बे पटरी से उतरे। हादसे का शिकार हुए ज्यादातर डब्बे बीच से पलटे। रसोइयान का डब्बा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। 
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रेल हादसा
ट्रेन के दो डब्बे पटरी किनारे चौधरी तिलराम इंटर कालेज में घुस गए। मौके पर नजारा भयावह था। महिलाओं और बच्चों के चीखने-चिल्लाने का शोर मचा हुआ था। 
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ट्रेन हादसा
कलकत्ता शहर के राजेश दास के साथ मोहल्ले की करीब 40 महिलाएं भी कोच एस-1 में सवार थीं, सभी यात्री हरिद्वार स्नान के लिए जा रहे थे। हादसे के किसी तरह राजेश दास बाहर निकले और लोगों की मदद से अपने साथी यात्रियों को बाहर निकाला। 
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ट्रेन हादसा
चार महिलाएं लापता थीं, उनकी तलाश के लिए वह रोते-बिलखते फिर रहे थे। राजेश दास ने बताया कि ट्रेन तेज गति से दौड़ रही थी। अचानक ब्रेक लगा और डब्बे पटरी से दो-ढाई फुट ऊपर उछल गए।

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ट्रेन हादसा
गाजियाबाद निवासी कुलदीप यादव उन लोगों में से हैं, जो हादसे में सकुशल बच पाए। कुलदीप ने बताया कि अचानक ट्रेन में झटका लगा और तेज धमाके के साथ  डब्बे पटरी से उतरते चले गए। 

 

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ट्रेन हादसा
कुलदीप का कहना है कि उनके डब्बे में ज्यादा भीड़ नहीं थी। वह हादसे के बाद बचकर बाहर निकले। मुजफ्फरनगर के नईमंडी के रहने वाले सोमदत्त भी हादसे में बच गए। वह गाजियाबाद में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। काम निपटाकर ट्रेन से घर लौट रहे थे। 

 

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ट्रेन हादसा
​उनका कहना है कि वह कोच एस-4 में सवार थे। उनके डब्बे में ज्यादा भीड़ थी। ट्रेन बहुत तेजी से दौड़ रही थी। अचानक डब्बे पलटे। कुछ पता ही नहीं चल पाया कि क्या और कैसे हुआ। इसके अलावा मध्यप्रदेश के सतना जिले की राजबाला अपने पति के साथ हरिद्वार जा रही थी। 
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ट्रेन हादसा
हादसे के बाद से उसके पति का कोई पता नहीं है। महिला रोती-चीखती फिर रही थी, लेकिन उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था। जैसे ही कोई लाश निकाली जाती, राजबाला दौड़़कर वहां पहुंचती। देर रात तक उसके पति का कोई पता नहीं चल पाया। 
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