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एक साथ जलीं चार चिताएं: केएमपी हादसे के बाद सामने आया खौफनाक मंजर, अपनों को आखिरी विदाई देते रो पड़ा पूरा गांव

Wed, 02 Sep 2026 09:23 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, किशनी

सार

हरियाणा में हुए हादसे के बाद मंगलवार रात सपा नेता विजय यादव (65), किसान महेश यादव (60), कमला देवी (60) और रेशमा देवी (45) के शव गांव पहुंचे। अपनों के बेजान शरीर देख परिजन के कलेजे कांप उठे।
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किशनी में एक साथ चलीं चार चिताएं - फोटो : अमर उजाला
नियति की क्रूरता जब कहर बनकर टूटती है, तो हंसते-खेलते संसार को राख में तब्दील कर देती है। हरियाणा के केएमपी (कुंडली-मानसर-पलवल) एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे ने मैनपुरी के किशनी क्षेत्र को ऐसा जख्म दिया है, जिसे समय का मरहम भी शायद कभी भर पाए। बुधवार को बिलखते मासूम और आंखों में पथराए सपनों के बीच मातम के साये में परिजन ने अपनों को अंतिम विदाई दी। चीखों से गांव चांदा, हविलिया और मुरगिया गूंज उठा। जिसने भी दर्द का यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
 
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अर्थी की सजाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
बेजान शरीर देख कांप उठए परिजनों के कलेजे
हरियाणा में हुए हादसे के बाद मंगलवार रात सपा नेता विजय यादव (65), किसान महेश यादव (60), कमला देवी (60) और रेशमा देवी (45) के शव गांव पहुंचे। अपनों के बेजान शरीर देख परिजन के कलेजे कांप उठे। रातभर घरों से दर्दभरी चीखें सुनाई देती रहीं। बुधवार की सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। 
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परिजनों से जानकारी लेते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
'परिवार पर इतना जुल्म क्यों ढाया?'
मासूम बच्चे अपनों को कफन में लिपटा देख शायद समझ गए थे कि अब दोबारा स्नेहभरी गोद नसीब नहीं होगी। बच्चों के चेहरे उतरे हुए और आंखें नम दिखाई दीं। गांव मुरगिया और चांदा से जब अर्थियां उठीं तो परिजन की चीखें गांव को दहलाने लगीं। जो चेहरे कल तक गांव की चौपालों और आंगनों में हंसते-बोलते थे, वे कफन में लिपटे श्मशान की ओर बढ़ रहे थे। हर किसी की आंखें सजल थीं और जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था- आखिर कुदरत ने इन परिवारों पर इतना जुल्म क्यों ढाया। जैसे-तैसे हिम्मत कर ग्रामीणों ने गमजदा परिजनों को संभाला और शवों को अंत्येष्टि स्थल ले जाया गया। परिजनों ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर चारों का अंतिम संस्कार किया।

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विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
पल भर में धुएं में तब्दील हो गए अपने
श्मशान घाट पर सन्नाटे को चीरती चीखों और सिसकियों के बीच हर आंख नम थी। एक साथ उठी अर्थियों और चिताओं ने पूरे गांव का कलेजा चीरकर रख दिया। अपनों को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। मुरगिया निवासी रामसेवक यादव ने कांपते हाथों से अपनी जीवनसंगिनी कमला देवी को मुखाग्नि दी, तो विनोद यादव ने भरी आंखों से पत्नी रेशमा देवी को विदाई दी। वहीं, विजय यादव की चिता को उनके बेटे विनय ने और हविलिया निवासी महेश की चिता को बड़े बेटे रवि ने नम आंखों से मुखाग्नि देकर आखिरी प्रणाम किया।
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गांव पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होने आईं घायल रूबी
हादसे में चांदा निवासी मृतक विजय यादव के पुत्र और पुत्रवधू रूबी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद रूबी ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव चांदा पहुंचीं। हालत खराब थी, महिलाएं संभालने का प्रयास कर रही थीं, मगर रूबी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह रो-रोकर कह रही थीं कि ससुर जी ने कभी बहू नहीं समझा, बेटी सा मान दिया।
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